साधुओं को नपुंसक बनाने के मामले में डेरामुखी की जमानत मंजूर
सीबीआई को लगा झटका, वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश हुआ गुरमीत
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला।
400 साधुओं को नपुंसक बनाने के मामले में डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को पंचकूला की विशेष सीबीआई कोर्ट ने शुक्रवार को जमानत मिल गई है। राम रहीम की जमानत याचिका पर उसे साध्वी यौन शोषण मामले में सजा सुनाने वाले जज जगदीप सिंह ने फैसला सुनाया है। हालांकि साध्वी यौन शोषण मामले में राम रहीम को जेल में ही रहना होगा। सीबीआई के स्पेशल ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कपिल राठी की कोर्ट से जमानत रद्द होने के बाद डेरा प्रमुख ने विशेष सीबीआई कोर्ट में जमानत याचिका लगाई थी।
मामले में डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह, डॉ. एमपी सिंह एवं अन्य के खिलाफ आरोप तय होने के बाद गुरमीत राम रहीम ने जमानत याचिका लगाई थी। राम रहीम ने कहा था कि मामले में आरोपी डॉक्टर को जमानत मिल चुकी है, इसलिए उसे भी जमानत दी जाए, लेकिन स्पेशल ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कपिल राठी की कोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी थी। शुक्रवार को स्पेशल सीबीआई कोर्ट से इस मामले में जमानत मिल गई।
सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने साधुओं को नपुंसक बनाए जाने के मामले में राम रहीम सहित डॉ मोहिंद्र इंसां व डॉ पीआर नैन के खिलाफ अगस्त में आईपीसी की धारा 326, 417, 506 और 120बी के तहत आरोप तय किए गए थे। बचाव पक्ष ने बहस करते हुए धारा 326, 417 और 120बी हटाने के लिए अपना पक्ष रखा। बचाव पक्ष के वकील ध्रुव गुप्ता ने बहस करते हुए कहा कि गुरमीत राम रहीम द्वारा किसी को भी नपुंसक नहीं बनाया गया है और वैसे भी इस मामले में सेक्शन 326 नहीं बनती है, क्योंकि जिन लोगों को नपुंसक बनाने की बात आ रही है, उनके सर्जिकल ऑपरेशन हुए हैं। सेक्शन 326 किसी खतरनाक हथियार का प्रयोग करने पर लगता है, जबकि इनका सर्जिकल ऑपरेशन हुआ है। इसलिए इस सेक्शन को हटाया जाना चाहिए। बचाव पक्ष ने धारा 417 (चीटिंग) पर पक्ष रखते हुए कहा था कि गुरमीत राम रहीम ने किसी के साथ धोखा नहीं किया है। इन साधुओं को मोक्ष प्राप्त करना था, इसलिए इन्होंने अपने अंडकोष कटवाए। इसमें राम रहीम का कोई लाभ नहीं था। कोई भी इंसान धोखाधड़ी तभी करता है, जब उसका कोई लाभ हो। इन साधुओं के अंडकोष कटवाने से गुरमीत राम रहीम को कोई लाभ नहीं होना था। मोक्ष केवल मरने के बाद ही मिल सकता है, इसलिए इस मामले में सेक्शन 417 भी नहीं बनती। इसके अलावा 120-बी आपराधिक षड्यंत्र पर गुरमीत राम रहीम के वकील और दोनों डॉक्टरों के वकीलों ने बहस करते हुए कहा कि आपराधिक षड्यंत्र कतई नहीं बनता, क्योंकि यदि मान लिया जाए कि गुरमीत राम रहीम ने साधुओं को मोक्ष प्राप्ति के लिए अंडकोष कटवाने के लिए कह दिया, लेकिन इससे डॉक्टरों को क्या लाभ होना था। डॉक्टरों को तो यदि साधुओं ने कहा कि अंडकोष काट दिए जाएं, तो उन्होंने ऑपरेशन कर दिया। आपराधिक षड्यंत्र तभी बनता है, जब तीनों का उद्देश्य एक हो, इसलिए यह धारा भी हटाई जानी चाहिए। वकीलों ने बहस करते हुए कहा कि यदि गुरमीत राम रहीम ने वर्ष 2000 में मोक्ष की बात कही थी तो उन्होंने वर्ष 2012 में शिकायत क्यों की। उन्हें एक साल बाद जब मोक्ष नहीं मिला तो उसी समय क्यों नहीं शिकायत की गई। इसलिए लगाए गए आरोप गलत हैं। इसके बाद आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए गए थे।