एचएसवीपी के चीफ एडमिनिस्ट्रेशन अदालत में हुए पेश
- याचिकाकर्ता किसानों को भुगतान कर दिया गया हैं: एचएसवीपी
- किसानों को मुआवजा मामले में अदालत ने जारी किया था वारंट
- सुप्रीम कोर्ट के फैसला के बावजूद किसानों को नहीं की गई थी अदायगी
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत का फैसला न मानने पर जारी गिरफ्तारी वारंट के बाद बुधवार को हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) के चीफ एडमिनिस्ट्रेटर जे. गणेशन अदालत में पेश हुए। इस दौरान उनके साथ एचएसवीपी के प्रशासक मुकेश आहूजा भी मौजूद रहे। किसानों को मुआवजे की अदायगी के मामले में प्राधिकरण की ओर से अदालत को बताया गया कि जिन किसानों की ओर से मुआवजा संबंधी याचिका दायर की गई है उन्हें भुगतान कर दिया गया है। शेष राशि का भुगतान भी जल्द कर दिया जाएगा।
सर्वोच्च न्यायालय का आदेश न मानने पर पंचकूला के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत की ओर से एचएसवीपी के चीफ एडमिनिस्ट्रेटर के नाम गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था। चीफ एडमिनिस्ट्रेटर को किसानों की मुआवजा राशि के भुगतान के लिए 15 दिनों का वक्त देते हुए कहा गया कि नियत तिथि तक भुगतान करें अन्यथा उन्हें गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया जाएगा। अदालत ने पंचकूला के डीसीपी को इस संबंध में आदेश जारी करते हुए एक एसीपी की ड्यूटी लगाने को कहा गया। लेकिन जे. गणेशन सुबह 10 बजे ही प्राधिकरण के प्रशासक मुकेश आहूजा सहित अन्य अधिकारियों के साथ अदालत पहुंचे।
2017 में सर्वोच्च न्यायालय ने किसानों को दिए थे भुगतान करने के आदेश
पंचकूला में सेक्टरों को बसाने के लिए 1989 में किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई थी। लेकिन, किसानों ने जमीन का रेट सही न मिलने के आरोप लगाते हुए मामले को लेकर हाईकोर्ट पहुंचे। उन्हें कोर्ट ने 380 रुपए प्रति वर्ग गज के मुताबिक भुगतान के आदेश दिए, लेकिन बाद में एचएसवीपी के तत्कालीन अधिकारी इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट चले गए। सुप्रीम कोर्ट ने 290 रुपये प्रति वर्ग गज का रेट तय करते हुए अक्तूबर 2017 में तीन महीने के अंदर बकाया राशि की अदायगी करने का आदेश दे दिया। बावजूद इसके किसानों को मुआवजा न मिलने पर किसानों ने पंचकूला में याचिका दायर कर दी।