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ंचकूला सेक्टर 6 के पुरानी बिल्डिंग स्थित निक्कू वार्ड के पास खुला सात बेड का कंगारू मदर केयर सेंटर

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शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की अच्छी पहल
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- पंचकूला सेक्टर-छह की पुरानी बिल्डिंग स्थित निक्कू वार्ड के पास खुला सात बेड का कंगारू मदर केयर सेंटर
- इस सेंटर का करीब सभी काम पूरा हो चुका है, एसी लगाने के बाद अगले माह से शुरू

अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। कम वजन वाले बच्चों की विशेष देखरेख के लिए सेक्टर-छह के जनरल अस्पताल में कंगारू मदर केयर सेंटर में सात बेड लगाए गए है। स्तनपान को बढ़ावा देकर शिशु मृत्यु दर कम करने की स्वास्थ्य विभाग ने अच्छी पहल की है। इस सेंटर की शुरुआत के बाद कम वजन के शिशुओं को दूसरे अस्पतालों का रुख नहीं करना पड़ेगा। कंगारू मदर केयर सेंटर में कम वजन के शिशुओं की देखभाल के लिए ट्रेंड चार यशोदा वर्करों की तैनाती की गई है। बता दें कि जनरल अस्पताल में होने वाली महिलाओं की डिलीवरी में हर माह करीब 30 शिशु ऐसे होते हैं, जिनका वजन बहुत कम होता है। ऐसी स्थिति में शिशु को चंडीगढ़ जीएमसीएच या फिर पीजीआई रेफर कर दिया जाता है। बाहर जाने के चलते अधिकतर कम पढ़े-लिखे परिजन कई बार बच्चे को पीजीआई तक नहीं ले जा पाते। इस कारण बच्चे की मौत भी हो जाती है।

एसी लगते ही होगी कंगारू मदर केयर सेंटर की शुरुआत
यह सेंटर अस्पताल के पुरानी बिल्डिंग में निक्कू वार्ड के पास सेंटर बनाया गया है। जहां पर शिशुओं की देखभाल कंगारू मदर केयर विधि द्वारा की जाएगी। बता दें कि ये सेंटर पूरी तरह से तैयार कर दिया गया है। हर बेड के साथ अलग-अलग पर्दे लगाए गए हैं। वहीं, बेड के पास ही रूम हिटर लगा है। इस सेंटर में फ्रीज से लेकर गीजर तक की सुविधा है। दो एसी लगने अभी बाकी है, एसी लगते हीं कंगारू मदर केयर सेंटर की शुरुआत कर दी जाएगी।
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बच्चे और बच्चे की मां के लिए होगी स्पेशल ड्रेस
मदर केयर सेंटर में पहुंचने वाले दो किलोग्राम से कम वजन वाले बच्चों के साथ उनकी मां को भी रखा जाएगा। अस्पताल में तैनात सीनियर स्टाफ नर्स शशि ने बताया कि उसमें महिला को पहनने के लिए विशेष गाउन दिया जाएगा। महिला अपने गाउन में अपने बच्चे को उसी तरीके से रखेंगी, जिस तरह से कंगारू अपने बच्चे को पेट के नीचे छुपाकर रखता है। इसका मुख्य कारण है कि उस गाउन से बच्चे को सामान्य तापमान मिलेगा और वह गर्मी व सर्दी से बचा रहेगा। इसके अलावा बच्चों के लिए भी स्पेेशल ड्रेस तैयार की गई है।

ये सुविधाएं मिलेंगी
कंगारू मदर केयर सेंटर में सात बेड लगाए गए हैं। इस पर लेटकर महिलाएं नवजात को स्तनपान कराएंगी। वहीं, नवजात के काफी कमजोर होने की स्थिति में एक ब्रेस्ट पंप, चम्मच व कटोरी भी दी जाएगी। जो नवजात मां के स्तन से दूध नहीं पी पाएंगे, उन्हें ब्रेस्ट पंप की सहायता से मां के स्तन से दूध निकाल कर कटोरी में इकट्ठा किया जाएगा। इसके बाद मां के दूध को चम्मच से नवजात को पिलाया जाएगा।

क्यों पड़ती हैं नवजात को कंगारू मदर केयर (केएमसी) की
सेक्टर-छह जनरल अस्पताल की चाइल्ड स्पेशलिस्ट मुक्ता कुमार ने बताया कि प्रीमेच्योर बेबी (प्रीमी) वह बच्चे होते हैं, जो आमतौर पर प्रेग्नेंसी के 37 हफ्ते से पहले पैदा होते हैं। समय से पहले जन्म लेने वाले इन बच्चों का वजन काफी कम होता है। ऐसे में समय से पहले जन्मे नवजात बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और उनकी कई तरह की बीमारियों से बचाव करने के लिए एक खास तरकीब अपनाई जाती है, जिसे कंगारू मदर (केएमसी) कहा जाता है। इस विधि में मां नवजात बच्चों को कंगारू की तरह अपनी स्किन से लगाकर रखती है। यह विधि इसलिए अपनाई जाती है ताकि शिशु का सर्वोत्तम विकास हो सके।

केएमसी के क्या है लाभ?
- केएमसी से बच्चे का वजन बढ़ता है।
- स्तनपान बेहतर होता है।
- शिशु का तापमान सही रहता है और शिशु इंफेक्शन से भी दूर रहता है।
- बच्चे और मां के बीच का रिश्ता मजबूत होता है।
- अस्पताल से जल्दी छुट्टी भी मिल जाती है।

केएमसी का निर्धारित समय कितना होनी चाहिए?
केएमसी की शुरुआत में एक घंटा और उसके बाद धीरे-धीरे इसका समय बढ़ाकर मां को पूरे दिन अपने शिशु को केएमसी देना चाहिए। केवल नैप्पी बदलने के लिए ही बीच में रुकना चाहिए। वहीं बच्चा ढ़ाई किलो तक का हो जाए तो आप केएमसी बंद कर सकते हैं। इसके अलावा बच्चे को केएमसी देने की कोशिश करें और बच्चा रोने लगे। असुविधाजनक महसूस करें, हाथ पैर मारने लगे तो समझ जाइए कि केएमसी बंद करने का संकेत आपको मिला रहा है।
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कंगारू मदर केयर सेंटर में सात बेड लगाए हैं। ताकि कम वजन वाले बच्चों की विशेष देखरेख हो सके। इसका काम पूरा हो चुका है। अभी दो एसी लगाए जाएंगे, इसके लिए आर्डर दिया जा चुका है, पंद्रह दिनों के भीतर इस वार्ड की शुरुआत कर दी जाएगी। - योगेश शर्मा, सीएमओ।
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