बिना वन विभाग से अनुमति मिले, फिर दिखा गए वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन का सपना
रेलवे स्टेशन के पंचकूला साइड का नवीनीकरण करने के लिए 17 हजार पेड़ काटने पड़ेंगे
- अध्यक्ष महोदय शताब्दी की स्पीड बढ़ाने के लिए उस लायक इंजन और रेलवे ट्रैक तो दिलवाइए
- चंडीगढ़ से अंबाला के बीच आने वाले कर्व भी राह में बड़ा रोड़ा
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। 31 मई से रेलवे की ओर से चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन को वर्ल्ड क्लास बनाने की कवायद शुरू कर दी जाएगी, लेकिन वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन के नवीनीकरण की राह में 17 हजार हरे पड़े रोड़ा बनेंगे। क्योंकि अभी तक रेलवे ने वन विभाग से इन पेड़ों को काटने के लिए अनुमति नहीं ली है। ये पेड़ रेलवे स्टेशन के दूसरी छोर पंचकूला साइड लगे हैं। पंचकूला साइड रेलवे स्टेशन का नवीनीकरण और विस्तार तभी संभव होगा, जब ये पेड़ काटा जाएंगे। इसके लिए रेलवे को सबसे पहले फॉरेस्ट कनजर्वेशन एक्ट 1980 के सभी नियमों का पालन करना होगा। इसी के तहत हरियाणा सरकार और भारत सरकार द्वारा अनुमति देने के बाद ही पेड़ काटे जा सकते हैं। अधिकारिक सूत्रों की माने तो जितने पेड़ काटे जाएंगे, उसका दस गुना कीमत रेलवे की ओर से वन विभाग को देना पड़ेगा, लेकिन इसके लिए पहले अनुमति लेनी होगी। वहीं, दूसरी ओर हर बार की तरह इस बार भी वर्ल्ड क्लास की मीठी गोली तो नहीं दे गए नॉर्दन रेलवे के आला अधिकारी और रेलवे की संसदीय स्थाई समिति के अध्यक्ष सुदीप बंदोपाध्याय। हैरत की बात है कि इस प्रोजेक्ट को लेकर अभी ग्राउंड लेवल पर ठीक से काम नहीं हुआ है और लोगों को महज ढाई साल में वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन देने का सपना दिखाया जा रहा है, जो संभव नहीं है। क्योंकि रेलवे को एक प्लेटफार्म तैयार करने में करीब चार साल लग गए और यहां वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन बनाने की बात हो रही है।
..और समिति अध्यक्ष के सुर में सुर मिलाते चले गए अधिकारी
चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर दौरा करने पहुंचे रेलवे की संसदीय स्थाई समिति के अध्यक्ष सुदीप बंदोपाध्याय ने अंबाला मंडल के अधिकारियों से पूछा कि शताब्दी चंडीगढ़ से दिल्ली तक जाने में कितना समय लेती है, अधिकारियों ने जवाब दिया कि चंडीगढ़ से दिल्ली तक शताब्दी को करीब 3.15 घंटे लगते हैं, इस पर उन्होंने कहा कि समय को कम कर 2.15 पर लाइए। कम से कम एक से सवा घंटे का समय कम होना चाहिए। ताज्जुब की बात है कि अधिकारियों ने हामी भी भर दी। अब सवाल ये है कि ऐसे हालातों में 2.15 घंटे में इस रेलवे ट्रैक और इंजन से चंडीगढ़ से दिल्ली तक पहुंचना संभव है।
.5 डिग्री का कर्व हो तब सवा दो घंटे में दिल्ली पहुंच पाएगी शताब्दी
तकनीकी माहिरों की मानें तो सिर्फ चंडीगढ़ से अंबाला के बीच .5 से 3 डिग्री तक के 16 कर्व ट्रैक पर हैं। इन घुमावदार 16 मोड़ों को निकाल कर नया ट्रैक बिछाना भी आसान नहीं है, क्योंकि ऐसा करने के लिए ट्रैक के आसपास बसी घनी आबादी को हटाना होगा। लोगों के घर भी तोड़ने पड़ेंगे। चंडीगढ़ से दिल्ली तक हाई स्पीड ट्रैक बनने के बाद 150 किमी. प्रति घंटों के रफ्तार से ट्रेन चल सकती है। इसके लिए भी रेलवे को नए सिरे से काम करना पड़ेगा। ऐसे में शताब्दी दो से अभी सवा दो घंटे में चंडीगढ़ से दिल्ली तक का समय पूरा करना मुश्किल है। इसके अलावा अभी रेलवे ट्रैक 52 केजी प्रति मीटर का है। यह कम से कम 60 केजी प्रति मीटर होना चाहिए।