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चीड़ का सबसे बड़ा जंगल चढ़ा आग की भेंट, बांस की प्लांटेशन भी जलकर हुई स्वाहा, चौबिस घंटे बादद भी धधक रहे जंगल

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मोरनी के चीड़ के जंगल सारयों में लगी आग
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- ग्रामीण बोले, 1999 के बाद पहली बार लगी जंगल में आग, जगली जानवरों को भी पहुंचा नुकसान
मोरनी।
कुछ दिन पहले बालग गांव के पास जंगल में लगी आग ने अपना रुद्र रूप दिखाया था, तो वहीं मंगलवार रात को फिर मोरनी के सबसे बडे़ चीड़ के जंगल सारयों में आग लग गई। जंगल में लगी आग इतनी भयानक थी जो कि देखते ही देखते काफी क्षेत्रफल में फैल गई जिससे काफी संख्या में हरियाली को नुकसान हुआ। साथ ही जंगली जानवर भी इसकी चपेट में आए। आग इतनी तेज थी कि उस पर काबू करना तो दूर इसके पास तक जाना संभव नहीं हो पा रहा है। इससे अलग भी बुधवार खोवा गांव व बडीशैर के जंगलों में भी आग की लपटों ने जंगल में तबाही मचाने का काम किया।
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वहीं, दूसरी ओर स्थानीय ग्रामीण बलवंत भींवर का आरोप है कि इससे पहले इस जंगल में दो दशक पहले आग लगी थी। लेकिन वन विभाग मोरनी इलाके का सबसे खूबसूरत व घने चीड़ के जंगल को भी नही बचा सका। खजान सिंह सारयों ने बताया कि वन विभाग द्वारा अपने चहेतों को फायर वॉचर के तौर पर रखता है। जो जंगलों की रखवाली के नाम पर लापरवाही बरतते है और जंगलों में आग लगने पर ग्रामीण ही उन्हें आग लगने की सूचना देते है। उन्होंने कहा कि अगर जंगलों को आग से नुकसान होता है तो उन्हें काफी दुख होता है।
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