विभाग की नाक के नीचे ही पेड़ों पर लगी है दीमक
- हादसे का मंडरा रहा है डर, दर्जनों पेड़ टूटने की कगार पर, सेक्टर-छह स्थित वन विभाग के कार्यालय में भी पेड़ों पर दीमक
- विभाग की ओर से अब तक पेड़ों पर नहीं किया कीटनाशक का छिड़काव
सर्वेश कुमार
पंचकूला।
पर्यावरण संरक्षण और पेड़ों की हिफाजत के दावे भी दीमक लगे पेड़ों की तरह खोखले साबित हो गए हैं। सड़कों के इर्द-गिर्द सैकड़ों पेड़ों की दीमक ने हरियाली को चाटकर खोखला कर दिया है। सेक्टर- छह, सेक्टर- नौ, सेक्टर- 15 सहित अन्य सेक्टरों की सड़कों पर पेड़ों को दीमक ने इस कदर खोखला कर दिया है कि तेज हवा के झोंके से कभी भी पेड़ टूटकर गिरने का खतरा मंडराने लगा है। हैरत की बात यह है कि पेड़ों में दीमक लगने की शुरुआत कई वर्ष पहले हो चुकी है, लेकिन न तो वन विभाग और न ही हॉर्टिकल्चर विंग ने पेड़ों को दीमक से बचाने के लिए कोई उपाय किया हो। अगर, पेड़ों के खोखले होने का सिलसिला जारी रहा तो शहर की हरियाली खोखली हो जाएगी।
शहर की मुख्य सड़कों पर सैकड़ों की संख्या में अलग-अलग प्रजाति के पेड़ लगाए गए। घने पेड़ों की छांव में गर्मियों के दौरान लोगों को छाया मिलती थी, लेकिन दीमक की चपेट में आने से खोखले हो चुके पेड़ अब हरियाली और छांव नहीं बल्कि हादसों को न्यौता दे रहे हैं। सेक्टर- छह, सेक्टर- 7/17/18/8 के गोल चक्कर के इर्द-गिर्द और सेक्टर- नौ में भी दीमक की वजह से दर्जनों पेड़ खराब हो चुके हैं। इससे पहले भी तेज हवा के झोंके की चपेट में आने से टहनियां टूटने के मामले सामने आ चुके हैं। लेकिन, इसे रोकने के लिए अब तक कोई पुख्ता कदम नहीं उठाया गया।
कीटनाशक का छिड़काव जरूरी
शहर में कुछ पेड़ तो दीमक की वजह से इतने खोखला हो चुके हैं कि कभी भी टूटकर गिर सकते हैं। कुछ पेड़ की जड़ों में भी दीमक का असर है, इसकी वजह से एक तरफ जहां पेड़ों की हरियाली खत्म हो चुकी है तो दूसरी तरफ टूटने का खतरा हर वक्त मंडरा रहा है। दीमक और मिट्टी के इस मेलजोल के कारण आसपास के पेड़ भी खोखले होने लगे हैं, जिन्हें रोकने के लिए जल्द से जल्द कीटनाशक का छिड़काव किया जाना जरूरी है।
विभाग की नाक के नीचे ही पेड़ों पर लगी है दीमक
वन विभाग के दफ्तर के बाहर भी सेक्टर-छह में दो पेड़ दीमक की चपेट में आ चुके हैं। अगर, इन्हें भी जल्द काबू नहीं किया गया तो तेज हवा के झोंके में गिरने की आशंका और बढ़ जाएगी। सेक्टर-छह में ही अस्पताल के सामने एक पेड़ की हालत इतनी जर्जर हो चुकी है कि वह कभी भी टूटकर गिर सकता है।
अब तक पेड़ों में लगने वाले दीमक को रोकने के लिए किसी तरह का छिड़काव नहीं किया गया है। पेड़ों में इस तरह की समस्या क्यों आती है, इसका भी अध्ययन किया जाना चाहिए। फिलहाल शहर के अधिकतर क्षेत्र नगर निगम की हॉर्टिकल्चर विंग के अधीन की जा चुकी है। - पवन शर्मा, डीएफओ, पंचकूला
..और विभाग कर रहा शिकायत का इंतजार
इस तरह की अब तक किसी ने कोई शिकायत नहीं दी है। लेकिन पेड़ों के सर्वे का काम जल्द शुरू किया जाएगा। इसके लिए न केवल उनकी संख्या बल्कि उनके हालात पर गौर कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। दीमक से बचाने के लिए इंसेक्टिसाइड का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे पेड़ों के खोखला होने का खतरा भी नहीं रहेगा। - एचएल नंदवानी, जेई हॉर्टिकल्चर विंग, नगर निगम।