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बरवाला में राज्य कृषि विभाग बोर्ड द्वारा बनाए गए शौचालयों के घोटाले की जांच शुरू।

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बरवाला मंडियों में दो शौचालयों पर लगे सीमेंट के 500 कट्टे और 12 क्विंटल स्टील
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- आरटीआई में मिली जानकारी से हुआ घोटाले का खुलासा, विधायक ने उपायुक्त को दिए जांच के आदेश
- राज्य कृषि विभाग बोर्ड की ओर से अनाज मंडी और सब्जी मंडी में बने हैं दो शौचालय

अमर उजाला ब्यूरो
बरवाला।
हरियाणा राज्य कृषि विभाग बोर्ड अनाज मंडी व सब्जी मंडी बरवाला में नवनिर्मित दो शौचालय इन दिनों जांच के घेरे में हैं। आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार बरवाला अनाज मंडी और सब्जी मंडी में दो शौचालयों को बनवाने का करीब 18 लाख रुपये का एस्टीमेट बनाया गया और करीब 12 लाख रुपये का कुल खर्च दिखाया गया। वहीं, अंतिम बिल अभी आना बाकी है। वहीं, इन दोनों शौचालयों 12 क्विंटल से अधिक स्टील का प्रयोग इस्तेमाल करने की बात की जा रही है और इसके बिल मांगे तो बोले बिल तो एकाउंट ब्रांच से गुम हो गए। हैरानी की बात यह है कि 15 क्विंटल स्टील कहां लगा और ऐसे कैसे शौचालय बनाए जिन पर इतना खर्च हुआ।
दूसरी तरफ निर्माण में हुए घोटाले की आशंका जताते हुए बतौड़ गांव के आरटीआई एक्टिविस्ट मनीष कुमार ने जिला उपायुक्त व विधायक ज्ञानचंद गुप्ता को शिकायत देकर इस घोटाले की जांच की मांग की है। आरटीआई कार्यकर्ता ने बताया कि अमूमन स्वच्छता अभियान को लेकर लोगों को शौचालय बनाने के लिए 12 हजार रुपये दिए जाते हैं लेकिन कभी-कभी वो भी नहीं मिलते हैं। लेकिन जब सरकारी विभाग शौचालय का निर्माण करते हैं तो करीब एक शौचालय का एस्टीमेट नौ लाख रुपये तक रख दिया जाता है। मनीष कुमार ने बताया कि जब उन्हें बिल नहीं मिले तो उसने विभाग में अपील डाली। इस पर विभाग की तरफ से लिखा गया कि एकाउंट ब्रांच से बिल गुम हो गए हैं और अन्य रिकॉर्ड भी गुम हो गया। अब यह तो कृषि विभाग ही बताएगा कि बिल गुम होने की शिकायत पुलिस को दी या नहीं या फिर विभाग अपने स्तर पर ही जांच कर रहा है। मनीष कुमार ने बताया कि जब मैंने आरटीआई डालकर ये बिल मांगे तो मुझे शौचालय सीट, रेत, बजरी, ईंटें इत्यादि का कोई बिल नहीं दिया गया। इसमें बताया गया कि सीमेंट के 500 थैले निर्माण में लगे।
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बकौल मनीष कुमार स्टील का बिल बाई पोस्ट भेजा गया। जब उसकी फोटोकॉपी मांगी गई और इन दोनों बिलों में भी अंतर पाया गया। पहले वाले स्टील बिल में कस्टमर के सिग्नेचर हैं और दूसरे वाले बिल में नहीं हैं। पहले वाला बिल वेरीफाई किया है लेकिन दूसरे वाला बिल वेरीफाई नहीं है। जिस दुकानदार ने बिल जारी किया है, पहले वाले बिल और दूसरे वाले बिल में सिग्नेचर में अंतर है जबकि विभाग इसे ओरिजनल बिल की कॉपी बता रहा है।
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वहीं, इस मामले को लेकर विधायक ज्ञानचंद गुप्ता ने कहा कि उन्होंने इस मामले को जांच के लिए जिला उपायुक्त को भिजवाकर शीघ्र ही कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं।
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