यूपी की सिमरन ने 100 मी. दौड़ में जीता स्वर्ण पदक
- 18वीं नेशनल पैरा एथलेटिक चैंपियनशिप के दूसरे दिन खिलाड़ी दौड़ते समय गिरे, फिर उठे संभले और दर्ज की जीत
- उड़ीसा की जयंती बेहरा ने चैंपियनशिप की 100 मीटर दौड़ 13 सेकेंड में पूरी कर जीत हासिल की
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला।
सेक्टर-तीन के ताऊ देवीलाल स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में सोमवार को दिव्यांग खिलाड़ियों का जज्बा देखने लायक था। 18वीं नेशनल पैरा एथलेटिक चैंपियनशिप में हिस्सा लेने के लिए सुबह दस बजे ही एथलेटिक्स ग्राउंड में 28 राज्यों के करीब 1470 खिलाड़ी पहुंच गए। खेल की शुरुआत हुई और इन सबके बीच कुछ दिव्यांग खिलाड़ियों ने खेल के मैदान में ऐसा प्रदर्शन किया कि लोग देखते रह गए। कुछ ने कम समय में पहला स्थान हासिल कर लोगों की वाहवाही लूटी तो कई दिव्यांग खिलाड़ी दौड़ते समय गिरे, उठे संभले और जीत दर्ज कर लोगों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। आइए कुछ ऐसे खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर बात करते हैं
डॉक्टरों के मना करने के बावजूद लिया इवेंट में हिस्सा
100 मीटर रेस में यूपी की सिमरन ने महज 13 सेकेंड में पूरी कर स्वर्ण पर कब्जा कर लिया। टी-13 कैटेगरी में खेलने वाली गाजियाबाद की सिमरन के पैर में इंजरी है, डॉक्टरों के मना करने के बाद भी सिमरन ने नेशनल पैरा एथलेटिक चैंपियनशिप में हिस्सा लिया और जीत दर्ज की। खेल के प्रति आर्मी में तैनात उसका पति गजेंद्र सिंह उसका हौसला बढ़ाता है। दोनों ने अभी हाल ही में लव मैरिज की है। पति और पत्नी दोनों एक-दूसरे के लिए प्रेरणा हैं।
मिनी पैरा ओलंपिक की खिलाड़ी संगीता बिश्वनोई भी पहुंची
नेशनल में हिस्सा लेने के लिए जोधपुर की संगीता बिश्नोई भी पहुंची हैं। वह 2003 लंदन में आयोजित पैरा ओलंपिक चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीत चुकी हैं। इसके लिए उन्हें अवार्ड के रूप में 215 पौंड मिले थे। संगीता छह वर्ष की आयु में बिजली के 11 वोल्ट के चपेट में आने के नि:शक्त हो गई थीं। संगीता ने सोमवार को जेवलिन थ्रो में सिल्वर मेडल जीता है।
जयंती ने फिर रचा इतिहास
सोमवार को एक बार फिर उड़ीसा की जयंती बेहरा ने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा है। टी-47 कैटेगिरी में जयंती ने 18वीं नेशनल पैरा एथलेटिक चैंपियनशिप की 100 मीटर दौड़ 13.11 सेकेंड में पूरी कर जीत हासिल की है। एक साल की उम्र में हीं जयंती आग में झुलस गई थी। गरीब परिवार में जन्मी इस बेटी के माता-पिता के पास उस समय इतने पैसे नहीं थे, कि बेटी का प्रॉपर इलाज करवा सकें और जयंती को अपना एक हाथ गवाना पड़ा। क्योंकि एक मजदूर परिवार में जन्मी इस बेटी की चार बहने और एक भाई भी थे। बड़ी मुश्किल से उसके पिता पूरे दिन मेहनत-मजदूरी करते तो 100 से 150 रुपये मेहनताना मिलता। ऐसी स्थिति में बच्चों का पेट ही मुश्किल था। बेटी का सर्जरी कैसे कराते। लेकिन ये बेटी जब अपने पैरों पर चलने लगी, उस दिन से उसने पीछे मुड़कर नहीं देख और आज इस बेटी ने अपने पूरे परिवार ही नहीं बल्की पूरे देेश का गौरवा बढ़ाया है। एशिया हीं नहीं पूरे विश्व में इस बेटी ने हजारों दिव्यांग खिलाड़ियों में अपनी एक अलग छाप छोड़ी है। महज तीन साल के खेल कैरियर में जयंती बेहरा पूरे देश में पैरा एथलेटिक रैंकिंग में पहले स्थान पर है, वहीं एशिया में तीसरे व विश्व में छठे स्थान पर काबिज है।
नेशनल
- 2016 पंचकूला ताऊ देवी लाल स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में आयोजित पैरा नेशनल एथलेटिक चैंपियनशिप एथलेटिक इवेंट 200, 400, 800 मीटर रेस में स्वर्ण पदक हासिल करने पर पूरे बेस्ट वुमेन एथलिट के खिताब से नवाजा गया।
- 2017 जयपुर में आयोजित पैरा नेशनल एथलेटिक चैंपियनशिप एथलेटिक इवेंट 100, 200, 400 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक हासिल किया। तीन इवेंट में जीत पर बेस्ट वुमेन एथलिट के खिताब से नवाजा गया।
इंटरनेशनल
- पहला, चीन के बीजिंग में 2017 में आयोजित चाइन ओपन ग्रैड पिक्स एथलेटिक चैंपियशिप के इवेंट 400 मीटर में स्वर्ण पदक हासिल किया।
- लंदन में आयोजित वर्ल्ड पैरा एथलेटिक चैंपियनशिप में देश भर से लड़कियों में अकेली पहुंची जयंती ने छठा स्थान हासिल किया।
- स्विट्जरलैंड में आयोजित जूनियर पैरा वर्ल्ड चैंपियनशिप के एथलेटिक इवेंट 400 मीटर दौड़ में स्वर्ण और 200 मीटर दौड़ में सिल्वर पदक हासिल किया।
- दुबई में आयोजित यूथ एशिया पैरा गेम्स के एथलेटिक इवेंट 200 मीटर दौड़ में स्वर्ण, 400 मीटर दौड़ में स्वर्ण, 100 मीटर दौड़ में सिल्वर पदक