मोरनी में दम तोड़ रही शिक्षा के लिए दी गई मूलभूत सुविधाएं
- गैस चूल्हे की बजाय लकड़ियों के सहारे चल रही मिड डे मील योजना
- लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद धूल फांक रहे एजूसेट सिस्टम
अमर उजाला ब्यूरो
मोरनी।
सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए शुरू की गई योजनाएं जरूरी संसाधनों के अभाव या फिर विभाग की लापरवाही के कारण दम तोड़ रही है। इन कमियों को सुधारने में ना तो सरकार कोई कदम उठा रही है और ना ही शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारी इन कमियों को दूर करने में कोई दिलचस्पी ले रहे हैं। हालात ऐसे है कि विभाग की ओर से मिड-डे-मील बनाने के लिए सिलिंडर तो उपलब्ध करवा दिया लेकिन उसे रिफिल कराने के लिए पुख्ता इंतजाम तक नहीं किए गए। ऐसे ही स्कूलों में लगे एजूसेट भी सालों से बंद पडे़ हैं। वहीं, स्कूलों में अध्यापकों की उपस्थिति को सुनिश्चित करने के लिए लाखों रुपये खर्च कर लगाई गई बायोमीट्रिक मशीन भी खिलौना बनकर रह गई है।
सालों से बंद पडे़ हैं एजूसेट:
सरकारी स्कूलों में बच्चों को प्राइवेट स्कूलों की तरह शिक्षा उपलब्ध करवाने के लिए स्कूलों में लाखों की लागत से एजूसेट किए गए, लेकिन लगभग सभी स्कूलों में एजूसेट बंद पडे़ हैं। एजूसेट को टीचिंग लर्निंग मैटीरियल योजना के तहत लगाया गया था, जिसका उद्देश्य बच्चों को रोजाना पढ़ाई से संबंधित प्रोग्राम दिखाकर उनके शिक्षा के स्तर को बढ़ाना था। वहीं मजे की बात तो यह है कि स्कूलों में एजूसेट की निगरानी के लिए लगाए गए चौकीदारों को शिक्षा विभाग की ओर से आज भी एक हजार रुपये मासिक मेहनताना दिया जा रहा है। वहीं, कुछ स्कूलों में बिजली न होने से आज भी एजूसेट लगने का इंतजार किया जा रहा है।
स्कूलों में लगी बायोमीट्रिक बनी मजाक
सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति को सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा विभाग की ओर से लाखों रुपये की बायोमीट्रिक मशीनें लगवाने पर तो खर्च कर दिया लेकिन इनसे विभाग का उद्देश्य पूरा नहीं हो पाया। क्योंकि कईं स्कूलों में बायोमीट्रिक मशीन तकनीकी खामी के कारण बंद पड़ी है कुछ नेटवर्क की समस्या के कारण धूल फांक रही है तो कुछ को बिजली का इंतजार है।
30-50 किमी. की दूरी तय कर अध्यापक भरवाते हैं सिलिंडर
मिड डे मील बनाने के लिए सिलिंडर तो उपलब्ध लेकिन भरवाने की समस्या के कारण और सरकारी आदेशों के बावजूद लकड़ी के सहारे मिड डे मील पकाया जा रहा। वहीं, ब्लॉक के सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए मिड डे मील बनाने के लिए गैस सिलिंडर का कनेक्शन ऐसी कंपनी का उपलब्ध करवाया गया है जिसकी ना तो मोरनी में गैस एजेंसी है और ना ही यहां पर उसकी सप्लाई आती है। गैस सिलिंडर खत्म होने पर तीस से पचास किलोमीटर की दूरी तय करके अध्यापक को अपने स्तर पर गैस सिलिंडर भरवाकर लाना पड़ता है।
अधिकारियों के कानों पर नहीं रेंग रही जूं
शिक्षा विभाग के अधिकारी सरकारी स्कूलों की इन समस्याओं पर लापरवाही बरत रहे हैं। बार-बार शिकायत व मांग के बावजूद अधिकारियों के कानों पर जूं नहीं रेंग रही है। एक माह से अधिक समय व्यतीत होने के बाद भी मशीनें बंद पड़ी है।