हुक्का बार पर पॉयजन एक्ट के तहत कसेगा शिकंजा
- चोरी छुपे चलने वाले हुक्का बार पर विभागों की नजर
- प्रतिबंध के बाद भी कैसे चल रहे हैं हुक्का बार, अब भी एक सवाल
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला।
अवैध तौर पर चल रहे हुक्का बार पर अब पॉयजन एक्ट के तहत कार्रवाई होगी। निकोटिन को जहर के दायरे में लाने के बाद भी कुछ हुक्का बार के अब ठिकाने बदले जा रहे हैं, लेकिन सिलसिला पूरी तरह थमा नहीं। नए कानून के लागू होने से पहले तक पूरे हरियाणा में ड्रग्स कंट्रोलर की टीम ने 37 मामले दर्ज किए, जिनमें दो में सजा भी हो चुकी है। चौंकाने वाली बात यह है कि पूरे प्रदेश भर के एक तिहाई मामले केवल पंचकूला में ही दर्ज किए गए, लेकिन अब भी हर्बल के नाम पर अवैध धंधा चल रहा है। सूत्रों की मानें तो अभी भी पंचकूला में पांच-छह हुक्का बार हैं, जहां नशे का अवैध खेल चल रहा है।
स्टेट ड्रग कंट्रोलर एनके आहूजा के मुताबिक हुक्का बार पूरी तरह प्रतिबंधित हैं। निकोटिन को नए एक्ट के तहत पॉयजन की श्रेणी में लाने से पहले तक दर्ज मामलों में 13-14 पंचकूला के हैं। हाल ही में टास्क फोर्स की बैठक में यह फैसला लिया कि सभी विभागों के सहयोग से अवैध तौर पर संचालित होने वाले सभी हुक्का बार को बंद किया जाएगा। पॉयजन एक्ट के तहत कवर करने के बाद इस पर पुलिस की ओर से कार्रवाई की जाती है। शहर में ऐसे हुक्का बार पर कार्रवाई के लिए ड्रग्स कंट्रोलर, स्वास्थ्य विभाग के साथ साथ पुलिस की टीमें भी लगातार कार्रवाई करती हैं।
सूत्रों के मुताबिक हर्बल के नाम पर अभी भी पंचकूला में पांच-छह ठिकानों पर हुक्का बार चल रहे हैं। इनमें निकोटिन का कितना इस्तेमाल होता है, इसके लिए सैंपल लेकर जांच के लिए भी भेजे जाते रहे हैं। लेकिन जांच रिपोर्ट मिलने के बाद ही संबंधित बार मालिक पर कार्रवाई का प्रावधान है। कुछ जगहों पर हर्बल और निकोटिन वाले हुक्का अलग-अलग रखे जाते हैं ताकि कार्रवाई होने पर हर्बल का सैंपल भेजकर कार्रवाई से बच जाते हैं। हालांकि हुक्का बार पूरी तरह प्रतिबंधित हैं।
सैंपल की जांच रिपोर्ट के बाद होगी कार्रवाई
हाल ही में सेक्टर-21 के एक बार में छापेमारी हुई थी। जिसमें सैंपल भी लिए गए थे, लेकिन इनकी जांच रिपोर्ट मिलने के बाद ही कोई कार्रवाई होगी। अधिकतर, मामलों में सैंपल भरते वक्त पुलिस डीडीआर दर्ज कर लेती है, अगर निकोटिन की होती है तो इन मामलों में एफआईआर दर्ज की जाती है।
नुकसान
- हुक्के का अगर एक के बाद एक कई लोग इस्तेमाल करे तो संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बना रहता है।
- धुएं की वजह से अस्थमा सहित और बीमारी होने का खतरा रहता है जबकि सिगरेट या हुक्का न पीने वाले पैसिव स्मोकर बन जाते हैं।
- फेफड़े की बीमारी का खतरा जबकि अगर निकोटिन का सेवन किया जा रहा है तो लोग नशे के आदी भी हो जाते हैं।