घरेलू बजट के सुधरने की उम्मीदें हुई फीकी
- 40 हजार से कम मासिक आय वालों के लिए बचत एक सपना
- बजट में लुभावने वादे किए गए, लेकिन हकीकत कुछ और
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला।
राशन, शिक्षा, वाहनों में ईंधन, दूध के अलावा फल और सब्जियों के मद में चार सदस्यों के परिवार के लिए हर माह न्यूनतम 40 हजार रुपये खर्च होते हैं। अगर, इससे कम हैं तो उन्हें कमाई के लिए अतिरिक्त जरिया अपनाना पड़ रहा या पति-पत्नी दोनों के लिए नौकरी जरूरी है। 50 हजार या इससे अधिक आय वालों से थोड़ी बचत की उम्मीद कर सकते हैं, लेकिन अगर उन्होंने अपने जीवन में मनोरंजन या मौज मस्ती पर थोड़ा भी अधिक खर्च कर दिया तो घरेलू बजट के बिगड़ने का खतरा भी बढ़ जाता है। टैक्स के बोझ से परेशान, मध्यम वर्गीय परिवार को टटोलने से यह बात साफ हुई कि वर्ष 2018-19 के बजट से उनके लिए उम्मीदों की रोशनी के तमाम रास्ते बंद हो चुके हैं। बजट में लुभावने वादे किए गए, लेकिन हकीकत कुछ और है।
गृहणी माफी देवी ने इस बजट को निराशाजनक बताते हुए कहा कि महिलाओं के लिए बजट में कोई खास राहत नहीं मिली। कामकाजी महिलाओं के पीएफ की कटौती कम होने से उन्हें अधिक वेतन जरूर मिलेगा, लेकिन सामाजिक सुरक्षा के नाम पर वह पहले की अपेक्षा और कमजोर हो जाएंगी। पति सुच्चा सिंह की तनख्वाह करीब 60 हजार है, लेकिन दो बच्चों की पढ़ाई और जरूरी कार्यों को पूरा करने के बाद बचत के लिए काफी कम राशि बचती है।
किताब सिंह की पत्नी रामरति ने बताया कि एक बच्चे की पढ़ाई पर सालाना 2000, वाहन, राशन, दूध, सब्जियां और फलों सहित बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में ही काफी आर्थिक मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार जरूरी कार्यों के लिए भी बैंकों का रुख करना पड़ता है, अब बच्चों के बड़े होने पर थोड़ा सहारा जरूर मिल जा रहा है। लेकिन पति को करीब 40 हजार मिलते हैं, जिससे घरेलू बजट बनाने में काफी जोड़-तोड़ करनी पड़ती है।