ट्रैक्टर डिवीजन के कर्मियों को एचएमटी कंपनी में प्रवेश पर रोक
- कंपनी मैनेजमेंट ने लैटर के माध्यम से दी कर्मचारियों को जानकारी
- कर्मचारी बोले, कोर्ट के माध्यम से बनती कार्रवाई कराई जाएगी
अमर उजाला ब्यूरो
पिंजौर।
उत्तर भारत के एकमात्र ट्रैक्टर निर्माण के सार्वजनिक उपक्रम एचएमटी कंपनी में शनिवार को ट्रैक्टर डिवीजन के कर्मचारियों को अंदर जाने से रोक दिया गया। मौके पर भारी पुलिस बल के साथ-साथ कंपनी की अपनी सिक्योरिटी भी मौजूद रही। गौरतलब है कि पिंजौर स्थित एचएमटी कंपनी के ट्रैक्टर डिवीजन को साल 2016 में सरकार ने बंद करने का निर्णय लिया, उसी को अमलीजामा पहनाते हुए कर्मचारियों के लिए वीआरएस स्कीम निकाली गई थी। जिन कर्मचारियों और अधिकारियों को वीआरएस स्कीम के तहत फायदा पहुंच रहा था वे वीआरएस लेकर कंपनी को अलविदा कह गए। तकरीबन 150 कर्मचारी जिनकी नौकरी 7 साल से ज्यादा बकाया थी और उनको वीआरएस लेने से फायदा कम नुकसान ज्यादा हो रहा था। जिसके चलते उन्होंने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने मामले में सुनवाई हुए केस की अगली तारीख 30 जनवरी निर्धारित की। शनिवार को जब तकरीबन 150 कर्मचारी सुबह साढ़े आठ बजे एचएमटी प्रशासनिक भवन के सामने कंपनी में जाने के लिए एकत्रित हुए तो उन्हें कंपनी में जाने से मना कर दिया गया।
एचएमटी कार्मिक संघ के पूर्व प्रधान दीवान चंद ने बताया कि कंपनी मैनेजमेंट और सरकार लगातार धक्केशाही कर रही है। ये लोग कोर्ट के आर्डर को भी नहीं मान रहे। दीवान चंद ने बताया कि उनके पास कोर्ट का आर्डर है जिसमें ऐसा कहीं नहीं लिखा कि कर्मचारी कंपनी में नहीं जा सकते, लेकिन कंपनी मैनेजमेंट ने उन्हें लैटर के माध्यम से बताया कि वे कंपनी में प्रवेश नहीं कर सकते। हमने कंपनी मैनेजमेंट द्वारा दी गई लैटर की कॉपी ले ली है और हम अपने वकील के पास जाएंगे और आगे की जो भी कोर्ट के माध्यम से कार्रवाई बनती है वो करवाएंगे।