14 को होने वाली बैठक में सात एजेंडों पर होगी चर्चा
-नगर निगम के मौजूदा अस्तित्व में बदलाव के संबंध में भे गया रिजॉल्यूशन
-हिंसा मामले से हुए नुकसान और दहशत पर निंदा प्रस्ताव
-विकास कार्यों पर होगी प्रमुखता से चर्चा
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला।
नगर निगम के मौजूदा अस्तित्व में बदलाव संबंधी रिपोर्ट भेजने से पहले कमेटी की बैठक मंगलवार को होगी। इसके लिए मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर सहित तमाम पार्षदों ने रिजॉल्यूशन पास कर निगम आयुक्त को भेज दिया है। नगर निगम के मौजूदा स्वरूप को बरकरार रखने को लेकर इससे पहले हुई दोनों बैठकों में नगर निगम ने मजबूती से अपना पक्ष रख दिया है, लेकिन कमेटी की अगली बैठक के बाद स्थानीय शहरी निकाय को भेजी जाने वाली रिपोर्ट के आधार पर ही निगम के भविष्य पर अंतिम फैसला होगा।
नगर निगम, पंचकूला के आयुक्त राजेश जोगपाल ने 14 दिसंबर को नगर निगम की बैठक बुलाई है। इसमें सात एजेंडा रखे गए हैं, जिनकी कॉपी सांसद, विधायकों सहित सभी पार्षदों को भेज दी गई है। इस एजेंडा में 25 अगस्त को पंचकूला में हुई हिंसा के कारण शहर में सरकारी और निजी संपत्ति को हुए नुकसान और लोगों में फैली दहशत को लेकर निंदा प्रस्ताव रखा गया है।
शहर की सुरक्षा के मद्देनजर सेक्टरों में एंट्री गेट लगवाने, वार्डों में विकास कार्यों में तेजी लाने, मुख्यमंत्री की घोषणाओं को अमली जामा पहनाने सहित चौराहों के नामकरण, कालका-बद्दी रेल लाइन के लिए जमीन स्थानांतरण और वार्डों में सिविल वर्क को लेकर मुख्य रूप से चर्चा होगी। मीटिंग में कालका-पिंजौर क्षेत्र को नगर निगम के दायरे से बाहर करने पर भी चर्चा होगी। इस दौरान पार्षदों, मेयर के प्रस्ताव लेने सहित स्वच्छता और शहर को स्मार्ट सिटी की दौड़ में आगे बनाए रखने के लिए किए जाने वाले विकास कार्यों पर चर्चा होगी।
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कालका-पिंजौर को अलग करने से विकास की रफ्तार होगी धीमी
नगर निगम पंचकूला को भंग करने के प्रस्ताव का पार्षदों ने विरोध किया है। पार्षदों की दलील है कि अगर कालका और पिंजौर को अलग कर, नगर पालिका का गठन किया जाता है तो फंड की दिक्कत होगी, जिससे विकास कार्य भी प्रभावित होगा। कई सरकारी योजनाओं का फायदा नहीं मिल सकेगा। निगम के विकास कार्यों संबंधी रिपोर्ट में भी यह बात सामने आई है कि शहरी क्षेत्र की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक विकास कार्य हुए हैं। कालका विधायक लतिका शर्मा ने पंचकूला नगर निगम की ओर से पिंजौर और कालका में विकास कार्य न होने का हवाला देते हुए दोनों क्षेत्रों को अलग करने की मांग की थी।