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दर्जनों गांवों में पानी को तरसे ग्रामीणों, ग्रामीणों का आरोप समस्या का समाधान करने के बजाऐ अधिकारी कर रहे टाल मटोल,

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ग्रामीण बोले-पानी की सप्लाई नहीं दी तो अफसरों को बनाएंगे बंधक
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मोरनी खंड के दर्जनों गांवों में लोग परेशान, डीसी के खिलाफ धरना देने की चेतावनी
कहा-पेयजल की व्यवस्था नहीं, अभियान चला रहे खुले में शौचमुक्त का
अमर उजाला ब्यूरो
मोरनी।
मोरनी खंड के दर्जनों गांवों में पीने के पानी की समस्या से है। यहां पर दर्जनों गांवों में सप्ताहभर से ज्यादा समय से पानी की सप्लाई नही हो पाने के कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई गांवों पानी के लो प्रेशर से ग्रामीणों को पानी नहीं मिल रहा है। कई इलाकों में एक हफ्ते से पानी नहीं आ रहा है। ग्रामीणों ने जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से बात की। लेकिन वह कोई उचित जवाब नहीं दे रहे। इससे लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कई गांवों के लोगों ने एकत्रित होकर बताया कि अगर प्रशासन ने उनकी समस्या पर ध्यान नहीं दिया वह अधिकारियों को बंधक बनाकर रोष जाताएंगे। इसकी जिम्मेदारी डीसी गौरी पराशर जोशी की होगी। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि प्रशासन खुले में शौचमुक्त होने की बात करता है और पानी देने की जिम्मेदारी से दूर भागता है। ग्रामीणों ने कहा कि डीसी ने समस्या पर ध्यान न दिया तो डीसी को हटाने के लिए वह लघु सचिवालय में धरना शुरू करेंगे। वहीं इस बारे में जब जन स्वास्थ्य विभाग के जेई इंद्रजीत से बात करने के लिए फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।

बहानेबाजी करते हैं अफसर
मोरनी खंड की थापली सहित तीन पंचायतों के तहत पड़ने वाले भूंड, डंगराना, दपाना, भूडी, सिरमड़ा, थाणां के गावों में भी पानी की किल्लत से हाहाकार मचा है। यहां के ग्रामीण कई दिन से पानी की सप्लाई न होने पर मुश्किल में जी रहे हैं। यहां के ग्रामीण संजू, महिंद्र, हीरालाल ने बताया कि उन्हें पीने व अन्य जरूरी काम के लिए पानी नहीं मिल रहा है। लोगों का कहना था कि जब भी जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से बात करते हैं तो वह बहानेबाजी करते रहते हैं।
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तीन किमी दूर से ला रहे पानी
खेड़ाबागड़ा के पास दुकानदार बृजभूषण काला ने बताया कि पिछले एक सप्ताह से पानी की किल्लत के कारण उन्हें पीने के लिए 3 किलोमीटर दूर मांधना से पानी ढोकर लाना पड़ रहा है। बाइक आदि वाहनों पर पानी मुश्किल से आता है। और यह नाकाफी होता है। उन्होंने उच्च अधिकारियों से पानी की समस्या का उचित समाधान कराने का आग्रह किया है।
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डीसी नहीं दे रहीं ध्यान : ग्रामीण
ग्रामीणों का कहना है कि गांवों में पानी की सप्लाई नियमित रूप से न होने से खुले में शौचमुक्त भारत के अभियान को डीसी के ध्यान न देने से बड़ा झटका लगा है। लोगों ने कहा कि डीसी नेताओं की आवभगत में लगी रहती हैं, उन्हें जनता से कोई मतलब नहीं है। लापरवाह अफसरों पर वह कोई कार्रवाई नहीं कर रही हैं। जहां लोग सप्ताह भर तक पीने के पानी के लिए तरस रहे हों, वहां कैसे इस मुहिम को कामयाब बनाया जा सकता है। भारत सरकार व प्रदेश की भाजपा सरकार लोगों से खुले में शौचमुक्त भारत अभियान को कामयाब बनाने की अपील कर रही है। लेकिन गांवों तक मूलभूत सविधाओं की सैकड़ों कमियों की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
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