-उत्तर भारत में हरियाणा और दिल्ली टॉप पर, फास्ट ट्रैक कोर्ट में नाबालिगों को नहीं मिल रहा इंसाफ
विशाल पाठक
चंडीगढ़। पंजाब के फास्ट ट्रैक कोर्ट में नाबालिग से दुष्कर्म पोक्सो एक्ट के तहत 1,451 मामले लंबित पड़े हैं। राज्य भर में पोक्सो एक्ट के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई के लिए 18 एक्सक्लूसिव फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए गए हैं। देखा जाए तो इन सभी फास्ट ट्रैक कोर्ट में पोक्सो से जुड़े औसतन 80 मामले लंबित पड़े हैं।
उत्तर भारत में हरियाणा और दिल्ली टॉप पर हैं। हरियाणा में फास्ट ट्रैक कोर्ट में पोक्सो एक्ट के तहत कुल 4,420 और दिल्ली में 3,560 केस पेंडिंग पड़े हैं जबकि निर्भया केस के बाद केंद्र सरकार की ओर से एक गाइडलाइंस जारी की गई थी जिसमें इन फास्ट ट्रैक कोर्ट में हर सूरत में 6 महीने के अंदर चालान पेश कर केस का ट्रायल शुरू कर सजा का प्रावधान किया था। इन फास्ट ट्रैक कोर्ट में भी इंसाफ की रफ्तार धीमी पड़ती जा रही है। राज्य भर में महिलाओं से जुड़े अपराध के औसतन हर साल 10 हजार से ज्यादा केस रजिस्टर्ड होते हैं जबकि शिकायतों का आंकड़ा इससे अधिक हैं।
पंजाब में 10 ग्राम पंचायतों में खुलेंगी नारी अदालत
केंद्र सरकार पोक्सो एक्ट के तहत और महिला उत्पीड़न से जुड़े लंबित मामलों को देखते हुए नया कदम उठाने जा रही है। केंद्र सरकार पायलट प्रोजेक्ट के 16 राज्यों में नारी अदालत प्रोजेक्ट शुरू करने जा रही है। इसके तहत पंजाब के 10 ग्राम पंचायतों में नारी अदालत खुलेंगे। जहां महिलाओं से जुड़े आपराधिक मामलों में सुनवाई होगी। इन 16 राज्यों में नारी अदालत प्रोजेक्ट शुरू होगा उनमें पंजाब के अलावा हिमाचल प्रदेश, झारखंड, केरल, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड, तमिलनाडु, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम, महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक शामिल हैं जबकि दादर नगर हवेली, दमन एवं द्वीप और अंडमान एंव निकोबार में पांच-पांच ग्राम पंचायतों में यह नारी अदालत खुलेंगे।
ऐसे काम करेंगे नारी अदालत
ग्राम पंचायतों में शुरू होने वाली इन नारी अदालतों में 7 से 9 महिलाएं जोकि पंचायतों की प्रतिनिधि होंगी। यह इन नारी अदालत में महिलाओं से जुड़े अपराधों जैसे घरेलू हिंसा, पारिवारिक कलह, दहेज उत्पीड़न व अन्य मामलों में सुनवाई करेंगी। इन नारी अदालतों में महिलाओं को निशुल्क कानूनी मदद मिलेगी। बता दें असम और जम्मू-कश्मीर में 50-50 ग्राम पंचायतों में चल रही है।