इसकी शिकायत अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस के तत्कालीन उच्चाधिकारियों को दे दी थी। जिला पुलिस दो दिन तक बिक्रमजीत सिंह के अपहरण के बारे में कोई भी जानकारी नहीं जुटा पाई। दो दिन बाद बिक्रम की लाश श्री कीरतपुर साहिब के पास नहर से बरामद हुई थी। जिला पुलिस ने अस्पताल प्रबंधन की शिकायत के आधार पर इंस्पेक्टर नौरंग सिंह और उसके सहयोगियों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ की थी।
पुलिस जांच में पाया गया कि इंस्पेक्टर नौरंग सिंह अपनी पुलिस पार्टी के साथ बिक्रमजीत सिंह को बटाला स्थित एक ट्रैक्टर मरम्मत वाली वर्कशाप में ले गया था, जहां बिक्रमजीत को पहले टॉर्चर किया गया फिर उसकी हत्या कर दी गई। नौरंग और उसे साथियों ने बिक्रम पर थर्ड डिग्री का इस्तेमाल किया था। बाद में उसके शव को खुर्द-बुर्द करने के लिए उसे कीरतपुर की नहर में फेंक दिया था।
नौरंग सिंह ने कहा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे
उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद अदालत से बाहर दोषी इंस्पेक्टर नौरंग सिंह ने कहा कि, बिक्रम सिंह के परिवार ने पुलिस के सामने रोष प्रदर्शन से दबाव बनाकर उस पर मामला दर्ज करवाया है, जबकि बिक्रम का परिवार आतंकवाद से संबंध रखता है। वह जिला अदालत के फैसले के विरुद्ध पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।