पंजाब इन दिनों विशेषज्ञ चिकित्सकों के लगातार इस्तीफों को लेकर गहरी चिंता बनी हुई है। पिछले चार महीनों में सूबे के अलग-अलग स्थानों से 13 विशेषज्ञ चिकित्सक इस्तीफा दे चुके हैं। हालांकि उन्होंने इस्तीफे की वजह व्यक्तिगत और पारिवारिक बताई है लेकिन इसके बाद भी इस्तीफे की वजह सरकार का चिकित्सा क्षेत्र में बढ़ता दबाव बताया जा रहा है।
पंजाब की नई सूबा सरकार का स्वास्थ्य क्षेत्र पर विशेष फोकस है। चुनाव से पहले भी वादों में राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त करने के आम आदमी पार्टी कई वादे कर चुकी है। ऐसे में राज्य के चिकित्सा क्षेत्र में सरकार का काफी दबाव बढ़ा है। इसके बाद चिकित्सा क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहे कई विशेषज्ञ चिकित्सकों के इस्तीफे का दौर शुरू हो गया है।
पंजाब सिविल मेडिकल सर्विस (पीसीएमएस) एसोसिएशन द्वारा तैयार की गई सूची के अनुसार नकोदर में एमएस (ऑर्थो) के पद पर तैनात डॉ. धर्मवीर, नवांशहर में डॉ. ममता सुंडा (दवा), जगरांव में डॉ. राधा गोयल (त्वचा), लुधियाना में डॉ. मिलन वर्मा (सर्जरी), डॉ. जगमोहन, जो अतिरिक्त सिविल सर्जन संगरूर और डॉ. साहबजोत सिंह, एमडी, मेडिसिन, बाबा बकाला में तैनात हैं, ने इस्तीफे दे दिए हैं। वहीं, गुरदासपुर के फतेहगढ़ चूड़ियां में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रज्ञा खानूजा सरकार बनने के तुरंत बाद व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए अपना इस्तीफा दे चुकी हैं।
विवाद हैं वजह: पीसीएमएसए
पंजाब सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन (पीसीएमएसए) के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अखिल सरीन ने कहा कि डॉक्टरों के खराब इलाज से संबंधित हालिया विवादों ने कई डॉक्टरों को नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर किया है। कर्मचारियों, दवाओं, बुनियादी ढांचे और धन की भारी कमी है। इसके साथ ही आम जनता से भी उम्मीदें काफी ऊंची हैं। डॉक्टर बहुत दबाव में हैं।
डॉक्टर सरकारी नौकरी छोड़ रहे हैं, क्योंकि उन्हें निजी क्षेत्र में अधिक पैसा मिल रहा है। सरकारी नौकरी केवल पैसे से नहीं जुड़ी है। समाज के लिए भी हमारे कुछ दायित्व हैं। - डॉ. रंजीत सिंह घोत्रा, निदेशक, स्वास्थ्य सेवा, पंजाब।