स्मार्ट घड़ी पहनने के बाद चंडीगढ़ नगर निगम के कर्मचारियों की कार्यक्षमता में 67 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई थी। निगम और सूक्ष्मजीव प्रौद्योगिकी संस्थान (इमटेक) के सामूहिक सर्वे में सामने आया था कि प्रत्येक छह घंटे बाद कर्मचारियों की कार्यक्षमता क्षेत्रवार पहले की तुलना में बढ़ गई है। स्मार्ट घड़ी पर विवाद के बाद निगम ने इमटेक के साथ घड़ी पहनने वाले कर्मचारियों का क्षेत्रवार सर्वे कराया था। यह सर्वे अगस्त, सितंबर और अक्तूबर में किया गया था।
कमेटी ने कुछ देखे बिना ही कह दिया, अब घड़ी की जरूरत नहीं
स्मार्ट घड़ी को लेकर कर्मचारियों की हड़ताल के बाद तत्कालीन मेयर ने एक कमेटी बना दी थी, जिसे तय करना था कि कर्मचारी घड़ी पहनेंगे या नहीं। 6 माह तक कमेटी कोई निर्णय ही नहीं ले सकी। इधर, बिना घड़ी के उपयोग किए निगम 18 लाख रुपये महीने कंपनी को भुगतान करती रही। ऑडिट आपत्ति के बाद कमेटी ने आनन फानन में बैठक कर घड़ी के फायदे व नुकसान जाने बिना ही कर्मचारियों को घड़ी न पहनने की रिपोर्ट बना दी। इसे सदन ने अस्वीकार कर दिया।
सदन के निर्णय के बाद कुछ लोगों ने घड़ी पहनी है। कुछ अब भी मना कर रहे हैं। वेतन सदन के फैसले के अनुसार घड़ी पहनने वाले को ही मिलेगा। हां कोई घड़ी खराब है या समस्या है तो उसका निराकरण किया जा रहा है। -केके यादव, निगम आयुक्त