12 साल के एक बच्चे ने गंभीर बीमारियों से जूझ रही दो युवती व एक महिला सहित पांच लोगों को नया जीवनदान दिया है। शिमला निवासी पारस को सड़क हादसे के बाद पीजीआई में ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया था। छह दिन की काउंसिलिंग के बाद मां-बाप ने अपनी इस इकलौती संतान के ऑर्गन डॉनेट कर दिए।
इन्हें मिला नया जीवन
पारस की एक किडनी देहरादून की रहने वाली 35 वर्षीय एक महिला को ट्रांसप्लांट किया गया है। साल 2007 में डिलीवरी के दौरान उसकी किडनी डैमेज हो गई थी। 2009 में महिला के पति ने किडनी दी, लेकिन 2011 में फिर से डैमेज हो गई थी। तब से वह डायलिसिस पर थी। आखिरकार पारस का ब्लड ग्रुप उससे मैच कर गया।
पारस की दूसरी किडनी व पैंक्रियाज एक 24 वर्षीय युवती में ट्रांसप्लांट किया गया है। साल 1998 में युवती टाइप वन डायबिटीज से पीड़ित हो गई थी। साल 2014 में किडनी भी खराब हो गई थी। शिमला की रहने वाली युवती को किडनी और पैंक्रियाज ट्रांसप्लांट कर दिया गया।
पारस का लीवर चंडीगढ़ की एक 30 वर्षीय युवती में ट्रांसप्लांट किया गया है। साल 2006 में प्रेंगनेसी के दौरान किए गए टेस्ट में पता चला कि युवती का लीवर डैमेज हो रहा है। साल 2013 से वे डोनर का इंतजार कर रहे थे। आखिरकार पारस उनकी जिंदगी में नई रोशनी लेकर आया।