830 से 916 तक पहुंचे, हासिल करेंगे लक्ष्य: ढांडा
महिला एवं बाल विकास की राज्य मंत्री कमलेश ढांडा ने कहा कि 2011 में हरियाणा में एक हजार लड़कों पर 830 लड़कियां ही पैदा हो रही थीं। 2022 में 916 तक पहुंच गए हैं। यह 2015 में पानीपत से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से शुरू कि गए बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान का नतीजा है। नोडल विभाग के नाते अच्छा काम हो रहा है।
स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। लिंगानुपात में थोड़ी कमी देखने को मिली है, यह अस्थायी है। सामाजिक स्तर पर बदलाव के लिए अहम कदम उठा रहे हैं। 12 लाख जागरूकता रैलियां की हैं।
44 लाख 76 हजार बेटियों के जन्म पर कार्यक्रम किए। 23 लाख 81 हजार साक्षरता अभियान चलाए। 15 लाख स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खुद अभियान की समीक्षा कर रहे हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग हर महीने व त्रैमासिक स्तर पर समीक्षा बैठक करता है। लिंगानुपात बढ़ाने के लिए मुख्यालय अधिकारियों को फील्ड में भेजते हैं।
सामाजिक सुरक्षा की भावना जगानी होगी: सांगवान
जनवादी महिला समिति की राष्ट्रीय अध्यक्ष और समाज विज्ञानी डॉ. जगमति सांगवान ने कहा कि लड़कियों को लेकर अभिभावकों में सामाजिक सुरक्षा की भावना जगानी होगी। लिंगानुपात बढ़ाने की प्रक्रिया की कमियों को दूर करना जरूरी है।
जिलों से गलत आंकड़े नहीं दिए जाने चाहिए। कमजोर वर्गों को सुदृढ़ करना होगा ताकि वे बेटियों को बोझ न समझें। सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक तौर पर भी कदम उठाने की जरूरत है। बेटियों को प्रोत्साहन, रोजगार और सुरक्षा की दिशा में काम करना होगा।
2015 से अब तक लिंगानुपात
- 2015 876
- 2016 900
- 2017 914
- 2018 914
- 2019 923
- 2020 922
- 2021 914
- 2022 916 जून तक