डा. चौहान ने कहा कि देश की कुल 2.25 फीसदी आबादी पंजाब में है लेकिन पिछले पांच सालों में सड़क हादसों के दौरान हुई मौतों की कुल फीसदी 3.3 से 3.5 है। उन्होंने कहा कि पंजाब में सड़क हादसों में हुई कुल मौतें में से 15 फीसदी मौतें लुधियाना, पटियाला, श्री अमृतसर साहिब, बठिंडा, मोहाली और जालंधर जैसे शहरों में होती हैं।
रोपड़, मोहाली, फतेहगढ़ साहिब में औसत से दोगुना मौतें
एडीजीपी ने कहा कि प्रति दस लाख आबादी के हिसाब में सड़क हादसों से मौत की राष्ट्रीय औसत 119 है, जिसकी अपेक्षा पंजाब में हुई मौतों की संख्या 148 है। सूबे के तीन जिले रूपनगर, एसएएस नगर और फतेहगढ़ साहिब क्रमश: पहले, दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं । रिपोर्ट के अनुसार, साल 2017 के दौरान राज्य में रूपनगर, एसएएस नगर, फाजिल्का, तरनतारन जिलों को छोड़कर बाकी 18 जिलों में सड़क दुर्घटनाओं में कमी आई।
डा. चौहान ने बताया कि रिपोर्ट अनुसार पंजाब में ज़्यादातर मौतों का कारण वाहनों की तेज गति था। साल 2017 में तेज गति के कारण सड़क हादसों में कुल 2,363 लोग मारे गए। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार पंजाब में नये मोटर वाहनों का 9-10 प्रतिशत की दर से वृद्धि हुई है और पिछले साल औसतन रोज 300 कारों और 1700 दोपहिया वाहनों की रजिस्ट्रेशन पंजाब में की गई। मार्च 2017 तक पंजाब में कुल रजिस्टर किए गए नए वाहनों की संख्या 98,59,742 थी।