चंडीगढ़। टेंडर न होने के कारण दुकान और कैंटीन किराए पर न चढ़ने से पीजीआई को कोविड से पहले वित्तीय वर्ष 2019-20 में 12.27 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है। इस पर ऑडिट विभाग ने आपत्ति जताते हुए प्रबंधन से जवाब मांगा है। विभाग ने पीजीआई प्रशासन को इसके लिए जवाबदेह ठहराया है। विभाग की ओर से कहा गया है कि पीजीआई प्रशासन ने समय रहते दुकान, कैंटीन और मेडिकल शॉप का टेंडर नहीं किया। इस कारण उसे इतनी आर्थिक क्षति हुई है। पीजीआई प्रशासन ने इस संबंध में अभी तक जवाब नहीं दिया है। गौरतलब है कि पीजीआई में कई दुकानें ऐसी हैं जिसका मासिक किराया एक से डेढ़ करोड़ है। ऐसे में ऑडिट की आपत्ति बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि पीजीआई प्रशासन उन दुकानों की अलॉटमेंट में अनदेखी कैसे कर सकता है।
आर्थिक नुकसान के साथ मरीजों को भी हुई परेशानी
ऑडिट विभाग ने अपनी आपत्ति में इसे पीजीआई को आर्थिक नुकसान के साथ ही मरीजों के स्तर पर भी गलत ठहराया है। रिपोर्ट के अनुसार पीजीआई परिसर में समय पर दुकान, मेडिकल शॉप और कैंटीन का टेंडर न होने वहां इलाज के लिए आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को भी परेशानी झेलनी पड़ी, क्योंकि दुकानें बंद होने के कारण उन्हें परिसर से बाहर जाना पड़ा होगा।
कोविड के कारण इस बार भी स्थिति रही खराब
ऑडिट विभाग ने पीजीआई की 2019-20 की ऑडिट में आर्थिक क्षति पर आपत्ति जताई है, लेकिन उसके बाद की स्थिति और बदतर होगी। इसका कारण यह है कि कोविड के कारण 2020-2021 में लगभग 90 प्रतिशत दुकान, कैंटीन और मेडिकल शॉप पर ताला लगा हुआ था। स्थिति यह है कि टेंडर कॉल करने पर कोई टेंडर डालने वाला नहीं मिल रहा था।
पीजीआई में 2019-20 में इतने थे व्यावसायिक स्थल
दवाइयों की दुकान- 10
जन औषधि स्टोर- 2
अमृत फार्मेसी- 5
कैफेटेरिया- 4
चाय/कॉफी वेडिंग मशीन- 4
मैस हॉस्टल-3
फोटो स्टेट/ पीसीओ- 7
रसद, पंसारी, विभागीय स्टोर- 7
भोजन एवं स्नैक्स पटल- 1
कैंटीन-3
इलेक्ट्रानिक सामग्री-3
विविध-38
क्या कहते हैं अधिकारी
पीजीआई में एक बार में इतना रेवेन्यू लॉस नहीं हो सकता। इसे चेक करवाया जाएगा। इसमें जरूरी पहले का ब्रेकअप भी शामिल होगा। वहीं यह भी देखना होगा कि ऑडिट ने किन-किन जगहों को उसमें शामिल किया है, क्योंकि कई दुकान जो पहले थीं वे अब नहीं हैं।
-कुमार गौरव, डीडीए पीजीआई