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Chandigarh News: सीटीयू में 111 ड्राइवरों ने किया ज्वाइन, 7 दिन की मिलेगी ट्रेनिंग

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चंडीगढ़। चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग (सीटीयू) में कुछ ही दिन पहले 111 नए ड्राइवरों ने ज्वाइन किया है। इनमें से कई ड्राइवर पहले ट्रक, प्राइवेट बस या स्कूल बसें चला चुके हैं लेकिन सीटीयू जैसी हाईटेक और नई तकनीक वाली बसें उनके लिए बिल्कुल नई होंगी। ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती इन ड्राइवरों को यात्रियों की सुरक्षा, बसों की तकनीकी जानकारी और लंबे रूट पर संचालन के लिए पूरी तरह प्रशिक्षित करना है।
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विभाग ने नए ड्राइवरों को बस पर प्रशिक्षण देने का फैसला किया है। निदेशक परिवहन प्रद्युमन सिंह ने बताया कि सभी नए ड्राइवरों को 7 दिन का क्रैश कोर्स कराया जाएगा। इस ट्रेनिंग के लिए तीन बसें तैयार की गई हैं। उन्होंने कहा कि ड्राइवरों से यह भी पूछा गया है कि वे कितने दिन की ट्रेनिंग लेना चाहते हैं। जो जितने दिन चाहेंगे, सीटीयू की तरफ से उनकी ट्रेनिंग की व्यवस्था की जाएगी। उद्देश्य यह है कि किसी भी स्थिति में ड्राइवरों को परेशानी न हो और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। बताया कि उन्होंने खुद नए ड्राइवरों से बात की है और पूछा है कि किसने पहले कौन-कौन सी बसें चलाई हैं। सवारियों की सुरक्षा के ध्यान में रखते हुए सभी को पर्याप्त ट्रेनिंग दी जाएगी।

30 दिन की ट्रेनिंग के बाद होता है टेस्टः नरेश ठाकुर
हिमाचल रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (एचआरटीसी) में टेस्ट लेने वाले इंस्पेक्टर नरेश ठाकुर का कहना है कि गाड़ी चलाना केवल स्टीयरिंग पकड़ना नहीं है बल्कि यह एक बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि हिमाचल में किसी भी नए ड्राइवर को पहले 30 दिन की ट्रेनिंग दी जाती है और फिर टेस्ट होता है। अगर ड्राइवर फेल हो जाता है तो उसे 15 दिन की दोबारा ट्रेनिंग दी जाती है। इसके बाद भी असफल होने पर एक हफ्ते की विशेष ट्रेनिंग मिलती है। अगर तब भी पास न हो तो ड्राइवर को पूरी प्रक्रिया दोबारा करनी पड़ती है। यह प्रक्रिया इसलिए है ताकि कोई भी आधा-अधूरा प्रशिक्षित ड्राइवर यात्रियों की जान जोखिम में न डाले।
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एक्सपर्ट बोले- 7 दिन कम, कम से कम 30 दिन जरूरी
एक्सपर्ट्स का कहना है कि सीटीयू की बसें बीएस-6 मॉडल और नई तकनीक से लैस हैं। इन बसों में इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल, एयर कंडीशनिंग, डिफरेंशियल सिस्टम और एडवांस ब्रेकिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल होता है। अगर ड्राइवरों को इनकी पर्याप्त जानकारी नहीं होगी तो रास्ते में ब्रेकडाउन जैसी स्थिति आने पर उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा ईंधन की खपत नियंत्रित करने और बस की फिटनेस बनाए रखने के लिए भी ड्राइवरों को तकनीकी जानकारी होना जरूरी है इसलिए विशेषज्ञ मानते हैं कि 7 दिन का क्रैश कोर्स पर्याप्त नहीं है। सीटीयू को चाहिए कि एचआरटीसी और अन्य रोडवेज विभागों की तरह कम से कम 30 दिन की ट्रेनिंग अनिवार्य की जाए तभी नए ड्राइवर यात्रियों की सुरक्षा, सड़क पर बस के संचालन और तकनीकी समझ के मामले में पूरी तरह तैयार हो पाएंगे।
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