विश्व धरोहर में शामिल कालका-शिमला रेलमार्ग ने शनिवार को 110 साल पूरे कर लिए। इसकी शुरुआत 9 नवंबर 1903 को हुई थी। कालका-शिमला रेल मार्ग समुद्र तल से 2075 मी. की ऊंचाई पर है।
इस मार्ग की लंबाई लगभग 96 किमी है, जिसमें 102 सुरंगें और 4 मंजिला स्टोन आर्च पुल व मनमोहक घाटियों से होते हुए कालका से शिमला पहुंचता है।
इस मार्ग को 10 जुलाई 2008 में यूनेस्को द्वारा विश्व सांस्कृतिक एवं धरोहर में शामिल किया गया था। आज भी देश-विदेश से घूमने आने वाले पर्यटकों में इस मार्ग से यात्रा करने के लिए भारी उत्साह देखा जाता है।
सर्दी का मौसम हो या गर्मी का, हर सीजन में इस मार्ग में गुजरने वाली टॉय ट्रेनों में भीड़ होती है। सर्दी के मौसम में पहाड़ों के बीच बर्फबारी देखने के लिए सैलानी पहुंचते हैं तो गर्मियों में सुहाने मौसम का आनंद लेने के लिए।
इससे कालका स्टेशन का रौनक तो बढ़ा रहता ही है, कालका शहर भी गुलजार रहता है।
पहाड़ों के बीच घुमावदार रेलमार्ग है, जहां से टॉय ट्रेन गुजरती हैं। सुरंगों और पहाड़ों की हरियाली के बीच से गुजरती ट्रेनों में सफर करने का एक अलग ही मजा है।
यही वजह है कि ट्रेन से शिमला जाने में सड़क मार्ग से ज्यादा समय लगने के बावजूद सैलानी इसे ही प्राथमिकता देते हैं। अभी सर्दी शुरू हो गई है।
ऐसे में पहाड़ी वादियों का लुत्फ उठाने के लिए फिर से सैलानियों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई है।