13 साल के बेटे सुनील को हेरोइन के नशे में डूबा देख शुक्रवार अस्पताल में बैठी मां की आंखों में से आंसू रोकने का नाम नहीं ले रहे थे। रोते हुए पीड़ित मां कहती है कि सुनील को नशे का सेवन करता देख उसने अपने छोटे बेटे को नशे से दूर रखने के लिए फिरोजपुर के सरकारी स्कूल के हॉस्टल में डाल दिया है, ताकि वह नशेड़ी बच्चों से दूर रहे। गांव कुंडे में छोटे-छोटे बच्चे नशा कर रहे हैं और मरने की कगार पर पहुंच चुके हैं। सुनील की तबीयत भी बहुत खराब है।
सुनील की मां ने बताया कि सुनील जब तीन साल का था तो उसके पति की मौत हो चुकी थी। छोटा बेटा डेढ़ साल का था। दोनों के सहारे जीवन व्यतीत कर रही थी। जब सुनील की तबीयत खराब होने लगी तब पता चला कि सुनील पिछले दो साल से हेरोइन, स्मैक व गांजा का नशा कर रहा है। यही नहीं सुनील का दादा भी शराब और अफीम का आदी है। सुनील कहता है कि वह जीना चाहता है। वह नशा छोड़ देगा। जब उससे पूछा कि नशा कहां से खरीदता था उसने बताया कि फिरोजपुर की आवा बस्ती से नशा खरीदता था। पांच सौ रुपये की बहुत छोटी सी हेरोइन की पुड़िया मिलती थी।
नशा करने वाले नौजवान एचआईवी के अलावा अन्य भयानक बीमारी का शिकार हो रहे हैं। ऐसे दो मामले नशा छुड़ाओ केंद्र में आए हैं। एचआईवी नौजवान के जरिये उसकी पत्नी और उसके होने वाला बच्चा एचआईवी का शिकार हुआ है। एक चालीस साल की महिला भी शुक्रवार को नशे से मुक्त होने नशा छुड़ाओ केंद्र पहुंची है। जिसे दाखिल किया है।
इस मामले में जब मनोचिकित्सक डा. रचना मित्तल से बात की तो उन्होंने बताया कि सुनील की आयु बहुत कम है। हालत गंभीर है लेकिन इलाज हो सकता है। डा. मित्तल ने कहा कि नौजवानों में जागरूकता की बहुत जरूरत है। नशा करने वाले नौजवान एचआईवी व अन्य भयानक बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। ऐसे में यह नौजवान अपनी पत्नियों को भी भयानक बीमारियां लगा रहे हैं। नशे के प्रति जागरूक करने की जरूरत है। डा. मितत्ल ने अपील की है कि जो नौजवान नशा करते हैं और भयानक बीमारियों का शिकार हैं वह अपनी पत्नी व बच्चों को इस बीमार से बचाए।