हरियाणा विधानसभा चुनाव के दंगल में इस दफा आधा दर्जन से ज्यादा नए दल ताल ठोकेंगे। विनोद शर्मा की जन चेतना पार्टी, गोपाल कांडा की हरियाणा लोकहित पार्टी, हरियाणा तृणमूल कांग्रेस और समस्त भारतीय पार्टी जैसे दलों ने अभी से चुनावी मैदान में अपनी मौजूदगी दर्ज करानी शुरू कर दी है। पुलिस से वीआरएस लेकर आईजी रणवीर शर्मा और एडीजीपी आरसी जोवल भी सियासी पारी खेलने की तैयारी में है।
पिछले चुनाव में 39 उम्मीदवार थे
कांग्रेस, भाजपा, इनेलो, हजकां, बसपा, एनसीपी, सीपीआई, सीपीआईएम और शिअद जैसे प्रमुख दलों के अलावा अब ये दल भी जनता के बीच पहुंचने लगे हैं। बीते चुनाव में राष्ट्रीय, क्षेत्रीय समेत कुल 39 दलों के उम्मीदवार मैदान थे।
जबकि इस बार यह आंकड़ा चार दर्जन से ज्यादा पहुंच सकता है। हालांकि पिछले चुनाव में आयोग ने 55 दलों को पंजीकृत किया था। लेकिन चुनाव सिर्फ 39 दलों ने ही लड़ा था।
महाराष्ट्र का दल भी हरियाणा के चुनावी मैदान में
इनके अलावा महाराष्ट्र में सक्रिय आरपीआई (अठावले) भी यहां ताल ठोंकने की तैयारी में है। पार्टी अध्यक्ष रामदास अठावले कह चुके हैं कि भाजपा-हजकां गठबंधन टूटने पर उनकी पार्टी हजकां के साथ मिलकर चुनाव लड़ सकती है।
यदि बात नहीं बनी तो वे कम से कम 15 सीटों पर चुनाव लड़ सकते हैं। कांग्रेस से अलग होने के बाद विनोद शर्मा भी जन चेतना पार्टी बनाकर मैदान में कूद पड़े हैं। जबकि अदालती मामलों से जूझ रहे गोपाल कांडा भी जनता से वोट मांग रहे हैं।
पहले चुनाव में मैदान में थीं 11 पार्टियां
पंजाब से अलग होने के बाद हरियाणा विधानसभा के पहले चुनाव में कांग्रेस, भारतीय जनसंघ, माकपा, भाकपा, प्रजा सोसलिस्ट पार्टी, संयुक्त सोसलिस्ट पार्टी, स्वतंत्र पार्टी समेत कुल सात राष्ट्रीय दल मैदान में थे। जबकि अकाली दल (संत ग्रुप), रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया, विशाल हरियाणा पार्टी जैसे क्षेत्रीय दल भी चुनाव में ताल ठोंक रहे थे।