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हरियाणा: 11.40 लाख जरूरतमंदों को न पैसा मिला और न ही सरसों का तेल, विभाग के पास कार्ड धारकों के बैंक खाता नंबर ही नहीं

Mon, 28 Jun 2021 10:42 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

खाद्य और आपूर्ति विभाग के पास जरूरतमंदों के खाता नंबर नहीं है। यही वजह है कि इन्हें न तो पैसे मिल पा रहे हैं और न ही सरसों का तेल। विभाग के प्रवक्ता का दावा है कि बैंक खाते के कार्य को जल्द से जल्द पूरा कर लगभग दो माह में हर हाल में लाभार्थियों के खातों में सरसों के तेल की डीबीटी की पूर्ण देय राशि डाल दी जाएगी। वहीं जुलाई महीने से नमक का वितरण भी शुरू कर दिया जाएगा।
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बोतल में सरसों का तेल (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हरियाणा के 11.40 लाख जरूरतमंद परिवारों को न तो सरसों का तेल मिला और न ही इसके बदले घोषित की गई धन राशि। फिलहाल ये राशि मिलने के आसार नहीं दिख रहे हैं, क्योंकि विभाग के पास मात्र चार लाख कार्ड धारकों के ही बैंक खाता नंबर हैं, शेष उपभोक्ताओं के खाता संख्या लेने के लिए विभाग अब परिवार पहचान पत्र अथॉरिटी से संपर्क साध रहा है। विभाग का कहना है कि खाते जुटाने में करीब दो माह का समय लगेगा।

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गत 3 जून को खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने हैफेड द्वारा तेल उपलब्ध नहीं कराने के कारण डिपो पर तेल सप्लाई बंद करने की जानकारी दी थी। अगले दिन सरकार ने घोषणा की थी कि तेल खरीदने के लिए सरकार पात्र लोगों के खातों में 250-250 रुपये डालेगी। घोषणा के 24 दिन बाद जरूरतमंद परिवारों को मदद की दरकार है। इस समय प्रदेश में कुल 1140748 लाभार्थी हैं। इनमें से गुलाबी कार्ड वाले 248134 हैं, जबकि बीपीएल कार्ड धारकों की संख्या 892749 हैं।

...तो इस साल डिपो पर नहीं मिलेगा सस्ता तेल
आशंका जताई जा रही है कि इस साल डिपो पर सस्ता तेल नहीं मिल सकेगा। हैफेड के पास सरसों का पर्याप्त स्टाक नहीं है। जो है वह आउटलेटस के लिए रखा गया है। इस बार हैफेड ने 7 लाख क्विंटल सरसों खरीदने का लक्ष्य रखा था लेकिन एमएसपी 4650 से अधिक रेट पर सरसों बाहर ही बिक गया और हैफेड के हाथ खाली रह गए। दूसरा कारण नारनौल स्थित हैफेड तेल मिल में एक जून को आग लग गई, जिसमें करीब दो लाख लीटर सरसों का तेल जल गया, इसलिए उत्पादन पर असर पड़ा है। हैफेड के कई आउटेलट पर 15 किलोग्राम वाली कैन नहीं मिल रही है।
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सरकार ने बढ़ा दिया खर्च
पात्र लोगों का कहना है कि सरकार के इस फैसले से गरीब परिवारों को नुकसान होगा, क्योंकि हैफेड के एक लीटर तेल का मार्केट रेट 180 रुपये है, जबकि सरकार ने दो लीटर के लिए 250 रुपये देने की बात कही है। ऐसे में हर परिवार को 110 रुपये अधिक खर्च करने होंगे। ऐसे में प्रति परिवार 250 रुपये के हिसाब से प्रदेश सरकार के 28.51 करोड़ रुपये खर्च होंगे। अगर सरकार 360 रुपये प्रति परिवार पैसे देती तो करीब 41 करोड़ रुपये लगते। ऐसे में प्रति माह सरकार के करीब 12.54 करोड़ रुपये बचेंगे।

लाभार्थियों के बैंक खातों को लेकर कुछ दिक्कत आ रही है। बैंक खातों की जानकारी जुटाई जा रही है। विभाग इस पर गंभीरता से काम कर रहा है। जल्द ही इसका समाधान कर लिया जाएगा और लोगों को राशि जारी की जाएगी। - अनुराग रस्तोगी, एसीएस, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग।

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