चंडीगढ़। पीजीआई के एडवांस कार्डियक सेंटर ने 103 साल के बुजुर्ग की बंद रक्त नाड़ियों (ब्लॉकेज) को खोलने में कामयाबी हासिल की है। पीजीआई की ओर से दावा किया गया है कि संस्थान में पहली बार इतनी बड़ी उम्र के व्यक्ति की रक्त नाड़ियां सफलतापूर्वक खोली गई हैं। दुनिया में भी ऐसे केसों की संख्या सिर्फ नौ से 10 है। सर्जरी के बाद पेशेंट ने अच्छी तरह से रिस्पांस किया और वह बिल्कुल ठीक है। पीजीआई का दावा है कि 103 साल की उम्र में किसी की ब्लॉकेज खोलना आसान नहीं होता। यह जोखिमभरा ऑपरेशन था। इसमें पेशेंट की जान जाने का खतरा रहता है, मगर सूझबूझ और एक्सपीरियंस की मदद से जोखिम भरे केस भी आसान बन जाते हैं।
जटिल सर्जरी करने वाले एडवांस कार्डियक सेंटर के असिस्टेंट प्रो. डॉ. हिमांशु गुप्ता के मुताबिक पंजाब के श्री आनंदपुर साहिब के बाबा सोमवार दास को हार्ट अटैक की शिकायत के बाद इमरजेंसी में दाखिल कराया गया। जांच हुई तो पता चला कि हार्ट को रक्त सप्लाई करने वाली दो नाड़ियां ब्लॉक हैं। उम्र ज्यादा होने के कारण ब्लॉकेज काफी सख्त थीं। इस तरह की ब्लॉकेज खोलने में सबसे बड़ा डर नाड़ियां फटने का होता है। क्योंकि वह काफी कमजोर होती हैं। कमजोर शरीर होने की वजह से इंफेक्शन का भी खतरा रहता है। किडनियां काफी वीक होती हैं। आमतौर पर डॉक्टर व मरीज के अटेंडेंट ऐसे केस में जोखिम लेने से बचते हैं।
डॉक्टरों ने फैमिली को खतरे बताए, लेकिन परिजनों ने डॉक्टरों पर विश्वास जताया और ऑपरेशन के लिए हां कहा। डॉ. हिमांशु के मुताबिक इस किस्म की ब्लॉकेज के इलाज के लिए विशेष तकनीक की जरूरत पड़ती है, जो पीजीआई में उपलब्ध है। केस की निगरानी एडवांस कार्डियक सेंटर के एचओडी प्रो. यशपाल शर्मा ने की। उन्होंने बताया कि एडवांस तकनीक से दोनों नाड़ियों में स्टेंट डालकर ब्लॉकेज खोली गई। इससे मरीज ठीक हो गया और दो दिन के बाद उसे छुट्टी दे दी गई।
इसलिए महत्वपूर्ण है केस
-पीजीआई में पहली बार 103 साल की उम्र के मरीज की पहली बार ब्लॉकेज खोली गई।
-इससे पहले प्राइवेट हॉस्पिटल में 102 साल की उम्र की ब्लॉकेज खोलने में सफलता मिली थी।
-आमतौर पर 90 साल से ऊपर मरीज को हार्ट अटैक आने के बाद अटेंडेंट उसे हास्पिटल नहीं ले जाते। वे सोचते हैं कि इतनी उम्र में क्या ठीक हो पाएंगे।
-90 साल से ऊपर के पेशेंट भी ठीक हो सकते हैं। ऐसे केस में डॉक्टर व मरीज को सकारात्मक सोच रखनी होगी।