भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम छेड़ने वाले या लालफीताशाही से परेशान आम आदमी ने आरटीआई को हथियार बनाया। अब जेल में बंद कैदियों ने भी सूचना के अधिकार का सहारा लेना शुरू कर दिया है। हरियाणा की जेलों में बंद कैदी सूचना के अधिकार के तहत हर रोज करीब 100 याचिकाएं डाल रहे हैं। इसमें वह अपने मूल अधिकारों के बारे में सूचना मांग रहे हैं। उनके इस प्रयास ने जेल के अफसरों के माथे पर बल डाल दिए हैं।
जेल में बंद अपराधियों ने बाहर भले ही अपराधों को अंजाम दिया हो लेकिन, वह अपने अधिकारों को लेकर सजग हो रहे हैं। नियम और कानून के बारे में आरटीआई के तहत जानकारी मांगने पर अफसर हतप्रभ हैं। रोहतक, पानीपत, झज्जर, सोनीपत, करनाल, भिवानी आदि जिलों से हर रोज करीब 100 बंदी जेल में मिलने वाली सुविधाओं से लेकर खुद पर दर्ज मामलों की जानकारी तक मांग रहे हैं। जेल अधिकारियों की मानें तो पहले नाममात्र के बंदी ही सूचना मांगते थे, लेकिन पिछले छह सात माह से आवेदन की संख्या बहुत बढ़ी है।
दाल में पानी ज्यादा लगा तो मांग ली भोजन के मानक की सूचना
रोहतक की सुनारिया जेल में बंद एक कैदी को दाल में पानी अधिक लग रहा था, नमक-मिर्च भी चटख नहीं लगी तो उसने भोजन के मेन्यू और मानक की मांग कर दी। वहीं अन्य कैदी ने सर्दी और गर्मी से बचाव के लिए जेल की तरफ से किए जाने वाले इंतजाम की सूचना मांगी तो कई कैदियों ने अपने खिलाफ दर्ज केस के स्टेटस की जानकारी मांगी।
बंदियों के जागरूक होने का कारण
जेल अधिकारियों की मानें तो पिछले कुछ समय में जेल में पढ़े लिखे बंदियों की संख्या बढ़ी है। साथ ही समय-समय पर बंदियों और कैदियों को मानवाधिकार का पाठ पढ़ाया जाता है। जिसके कारण बंदी जागरूक होकर सूचना अधिकार के तहत जानकारी मांग रहे हैं।
हरियाणा के विभिन्न जिलों की जेलों के बंदी और कैदी रोजाना किसी न किसी बिंदू पर आरटीआई के तहत सूचना मांग रहे हैं। पिछले दिनों जेलों के निरीक्षण के दौरान यह बातें सामने आई थीं। सभी जेलों में बंदियों को सूचना देने के लिए अलग से पुलिसकर्मी की ड्यूटी लगाई गई है। पिछले पांच छह माह से सूचना मांगने वालों की संख्या बढ़ी है। - कृष्ण लाल पंवार,
जेल मंत्री, हरियाणा