दस साल की भांजी को हवस का शिकार बनाने वाले उसके दो सगे मामाओं को वीरवार को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई। पूरे देश को हिलाने वाले इस मामले में कोर्ट ने आदेश दिया कि दोनों दोषियों को जिंदा रहने तक जेल में रहना होगा। इसके अलावा उन पर 3.05-3.05 लाख रुपये जुर्माना भी लगाया है। इसमें 6 लाख रुपये बतौर मुआवजा पीड़िता को दिए जाएंगे।
चंडीगढ़ जिला अदालत में महिला अपराध के मामलों की सुनवाई के लिए बनाई गई विशेष कोर्ट की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश पूनम आर जोशी ने दोनों को पॉक्सो एक्ट 6 के तहत अधिकतम सजा सुनाई है।वहीं फैसले के बाद दूसरे दोषी (छोटा मामा) की पत्नी ने अदालत के फैसले के खिलाफ ऊपरी कोर्ट में अपील करने की बात कही।
गौरतलब है कि बच्ची से दुष्कर्म का उस वक्त पता चला जब वह छह माह की गर्भवती हो गई थी। जान को खतरा होने के कारण उसका गर्भपात नहीं किया जा सकता था। पीजीआई में 17 अगस्त को उसने एक बच्ची को जन्म दिया था।
107 दिन में आया फैसला
चंडीगढ़ जिला अदालत की एडीजे पूनम आर जोशी ने शुरू से ही केस का स्पीडी ट्रायल चलाया। 18 जुलाई को एफआईआर दर्ज होने के बाद से लेकर दो नवंबर तक 107 दिन में ही केस में फैसला आ गया। अदालत ने पहले आरोपी के खिलाफ 25 तो दूसरे आरोपी के खिलाफ मात्र 8 पेशियों में ही केस का ट्रायल पूरा कर दिया। देशभर में चुनिंदा ही ऐसे केस होंगे जिनमें 68वें दिन में ही दोषियों को सजा सुना दी गई हो।