यूटी प्रशासन हजारों शहरवासियों को बड़ी राहत देने जा रहा है। वर्षों से बंद पड़े सहकारी समितियों के फ्लैटों के हस्तांतरण नीति को सरल बनाने का निर्णय प्रशासन ने लिया है। यूटी एडवाइजर परिमल राय की अध्यक्षता में दो दिन पूर्व अधिकारियों की एक हाई लेवल मीटिंग हुई। इसमें फ्लैटों के हस्तांतरण से संबंधित कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। वित्त सचिव अजय कुमार सिन्हा, डीसी अजीत बालाजी जोशी, एमसी कमिश्नर केके यादव और संबंधित विभाग के अधिकारियों ने बैठक में भाग लिया।
बैठक के बाद मिली जानकारी के अनुसार, फ्लैटों के हस्तांतरण नीति को पूर्व में विभिन्न प्रशासनिक अधिकारियों ने अपने-अपने तरीके से लागू किया। इसके चलते वर्तमान में हस्तांतरण नीति काफी जटिल हो गई है। इसे सरल बनाया जा रहा है। बैठक में लिए गए निर्णयों को यूटी प्रशासक वीपी सिंह बदनौर को भेज दिया गया है। प्रशासक की मंजूरी मिलने के बाद इसे लागू किया जाएगा।
शहर के दक्षिणी इलाके में सहकारी समितियों के फ्लैट हस्तांतरण के अभाव में वर्षों से बंद पड़े हैं। इसको लेकर सहकारी समिति के रजिस्ट्रार ने हाल ही में 5 फरवरी 2016 को घोषित स्थानांतरण नीति पर प्रशासन से स्पष्टीकरण मांगा था। इस उच्च स्तरीय बैठक में जीपीए धारकों के फ्लैटों के हस्तांतरण के मुद्दों और हस्तांतरण शुल्क को तय करने पर भी चर्चा हुई। बैठक में मौजूद सदस्यों का मानना है कि अक्टूबर-2011 को जारी किए गए सुप्रीम कोर्ट के आदेश से पहले जीपीए को निष्पादित करने वाले मामलों में फ्लैटों के हस्तांतरण की अनुमति दी जा सकती थी लेकिन इस लेनदेन को अवैध कहा जा रहा था।
चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड द्वारा आवंटित भूमि पर शहर के सेक्टर-48 से लेकर सेक्टर-51 तक 10 हजार परिवारों के रहने के लिए फ्लैटों का निर्माण करवाया गया है। कई बार प्रशासन द्वारा अधिसूचित स्थानांतरण नीतियों के तहत फ्लैटों का आवंटन किया गया है।
अंतिम हस्तांतरण नीति की घोषणा 2016 में हुई थी। इस प्रक्रिया के तहत वाहनों के आधार पर फ्लैटों की बिक्री और खरीद की अनुमति थी। इसे मौजूदा स्टांप ड्यूटी के भुगतान पर हस्तांतरित किया जाना था लेकिन इस नीति के तहत मौजूदा स्टांप ड्यूटी का भुगतान आम लोगों को काफी महंगा सौदा सबित हो रहा था। इसके चलते वर्षो से फ्लैट बंद पड़े हैं।