जिला अदालत ने चंडीगढ़ प्रशासन के इंजीनियरिंग विंग के बिजली विभाग के रिटायर्ड कैशियर सेक्टर-44डी निवासी मंगत राम से 1.82 करोड़ रुपये के गबन के पैसे की रिकवरी करने के आदेश दिए हैं।
चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से दायर केस में मंगत राम पर साढ़े तीन करोड़ सरकारी रुपये के गबन का आरोप था। वहीं अदालत ने इस राशि पर 9 फीसदी की दर से ब्याज भी वसूलने के आदेश दिए हैं। यूटी प्रशासन के इंजीनियरिंग विंग की ओर से दाखिल रिकवरी सूट में कहा गया था कि मंगत राम ने 1977 में बिजली विभाग में बतौर एलडीसी ज्वाइन किया था। इसके बाद उसे जुलाई 2005 में प्रमोट कर कैशियर बनाया गया। उसे डिवीजन-3 में एग्जीक्यूटिव इंजीनियरिंग के कार्यालय में तैनाती दी गई थी। उनका काम उपभोक्ताओं से कैश, चेक, डिमांड ड्राफ्ट के जरिए पेमेंट लेना था। इसे वह सेक्टर-17 स्थित एसबीआई की ट्रेजरी में जमा करवाते थे।
मार्च 2008 में असिस्टेंट एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (एईई) ने एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को जानकारी दी कि सब डिवीजन नं-7 सेक्टर-35 से कई बार कैश जमा कराया गया, लेकिव वह बैंक तक नहीं पहुंचा है। उनके अनुसार साल 2007 में 20 नवंबर, 13 और 20 दिसंबर और साल 2008 में चार जनवरी, 14 फरवरी को ह्यूज अमाउंट जमा कराया गया, लेकिन यह पैसा सरकारी ट्रेजरी तक नहीं पहुंचा। हालांकि चालान में इसके जमा होने की जानकारी है।
2005 से 2008 के बीच किया गया घोटाला
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इसके बाद एईई ने स्टेट बैंक को लेटर लिखकर उसकी जानकारी मांगी तो 26 मार्च 2008 को बैंक के चीफ मैनेजर की ओर से जारी लेटर में बताया गया कि बैंक रिकार्ड के मुताबिक छह चालान के जरिए 10 लाख 566 रुपये जमा कराए ही नहीं गए हैं। इसके बाद विभाग स्तर पर इसकी जांच की गई तो सामने आया कि कैशियर मंगत राम ने बैंक में जमा कराई गई राशि के जो टोकन दिखाए थे वे फर्जी हैं। इसके बाद सरकारी पैसे के गबन के मामले में चीफ इंजीनियर ने मंगत राम को सस्पेंड कर दिया। साथ ही एसडीओ की ओर से मंगत राम के खिलाफ सेक्टर-36 थाने में आपराधिक मामला भी दर्ज कराया गया।
मंगत राम के सस्पेंशन के बाद सरकारी पैसे के गबन के कई और खुलासे हुए। विभाग स्तर पर जांच कराई गई तो पाया गया कि साल 2005 में 20 नवंबर से 22 जुलाई के बीच 19,27,283 रुपये, 2005-06 में 49,37,187 रुपये, 2006-07 में 64,48,863 रुपये, 2007-08 में 39,47,925 रुपये, 30 नवंबर 2007 से 14 फरवरी 2008 तक 10 लाख 556 रुपये सरकारी धन का गबन किया गया। यह राशि कुल मिलाकर 1,82,61,824 रुपये बनती थी।
एसबीआई की ट्रेजरी ब्रांच के चीफ मैनेजर ने पुष्टि की कि मंगत राम ने 49,37,187 रुपये, 64,48,863 रुपये और 39,47,925 रुपये भी बैंक में जमा नहीं कराए हैं। क्लर्क ने फर्जी चालान के जरिए इन पैसों का गबन किया था। विभागीय अधिकारियों के अनुसार मंगत राम ने एक करोड़ 82 लाख रुपये से भी अधिक के सरकारी पैसे का गबन किया था।
इसके बाद मंगत राम के खिलाफ भ्रष्टाचार की धाराओं के तहत दो आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे। वहीं पुलिस ने 28 मार्च 2008 में उसे गिरफ्तार किया था। इसके बाद से उससे 19,27,283 रुपये विभाग ने रिकवर भी कर लिए थे। इन केस में मंगतराम को जिला अदालत से सजा सुनाई जा चुकी है।