हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार व निजी स्कूलों की एसोसिएशन को नोटिस जारी कर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को निशुल्क वर्दी, किताबें व अन्य पाठ्य सामग्री समय पर प्रदान करने के मुद्दे पर जवाब मांगा है।
न्यायमूर्ति बीडी अहमद व न्यायमूर्ति संजीव सचदेव की खंड पीठ ने दोनों पक्षों को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्यों न इन बच्चों को सितंबर-अक्तूबर की अपेक्षा मार्च माह में ही उक्त सामग्री उपलब्ध करा दी जाए।
अदालत ने मामले की सुनवाई 11 मार्च तय की है। खंडपीठ के समक्ष जस्टिस फॉर ऑल के अधिवक्ता खगेश झा ने खंडपीठ को बताया कि तय नियमों के तहत आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के बच्चों को स्कूल में निशुल्क कॉपी-किताबें, वर्दी इत्यादि सामग्री निशुल्क प्रदान करने का प्रावधान है।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि हाल ही में दिल्ली सरकार ने माना था कि वह इस श्रेणी के बच्चों को पूरी सामग्री उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा कि आमतौर पर इस वर्ग के बच्चों को स्कूलों में सितंबर-अक्तूबर व नवंबर में जाकर वर्दी, किताबें इत्यादि प्रदान की जाती है जबकि स्कूलों में नया सत्र अप्रैल माह में शुरू हो जाती है।
ऐसे में सितंबर-नवंबर माह में वर्दी व किताबें इत्यादि प्रदान करने से उनकी शिक्षा प्रभावित होती है और वे अन्य बच्चों से पीछे रह जाते है। याची ने कहा कि ऐसे में सरकार व स्कूलों की एसोसिएशन को निर्देश दिया जाए कि बच्चों को मार्च माह में ही वर्दी, किताबें इत्यादि प्रदान कर दें ताकि बच्चों की शिक्षा प्रभावित न हो।