अधिक कीमत में मिल रही हैं किताबें
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यूपी बोर्ड के अधिकृत प्रकाशकों की किताबें बाजार से गायब करके अभिभावकों की जेब पर डाका डाला जा रहा है। ये उदाहरण केवल तीन विषय की किताबों का है।
यूपी बोर्ड में अधिकृत प्रकाशकों की किताबें में बाजार में नहीं हैं। दूसरी ओर निजी प्रकाशकों की किताबें बाजार में उपलब्ध हैं पर उनकी कीमत तीन गुने से ज्यादा है। अधिकृत प्रकाशकों की किताबें बाजार में न होने की वजह से अभिभावक महंगी किताबें खरीदने को मजबूर हैं।
इसके बावजूद इस ओर सरकारी अमला कोई ध्यान नहीं दे रहा है।यूपी बोर्ड का नया सत्र एक अप्रैल से शुरू हो गया है लेकिन अधिकृत प्रकाशकों की किताबें बाजार में नहीं हैं। इसकी वजह से अभिभावक निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें खरीद रहे हैं।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने सभी विषयों का सिलेबस तय कर रखा है। इसके बावजूद कोई प्रकाशक उसे 100 पेज में छापता है तो कोई 200 में। पन्नों की संख्या और कागज की क्वालिटी के नाम पर निजी प्रकाशक किताबों के मनमान रेट वसूलते हैं।