रैंकर दारोगाओं की सोमवार को लाटरी खुल गई। पुलिस मुख्यालय ने कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए उन्हें साल 1999 की वरिष्ठता प्रदान कर दी। इस फैसले से साल 2002 में सीधी परीक्षा में बने दारोगाओं की नींद उड़ गई, क्योंकि इंस्पेक्टर बनने की लाइन में वह पिछड़ गए हैं। दारोगा इस मामले को लेकर कानूनी राय-मशविरा ले रहे हैं।
उत्तराखंड बनने से पहले साल 1999 में रैंकर परीक्षा की विज्ञप्ति जारी हुई थी। इसके लिए अभ्यर्थियों का फिजिकल तो हो गया, लेकिन रिट दायर होने के कारण परीक्षा लटक गई। अलग राज्य बनने के बाद साल 2006 में रैंकर परीक्षा हुई।
लड़ रहे थे कानूनी लड़ाई
साल 2007 में ट्रेनिंग लेकर वर्ष 2008 में यह दारोगा ड्यूटी पर आ गए। तब से रैंकर दारोगा वरिष्ठता पाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे। यूपी सरकार साल 2013 में रैंकर को साल 1999 की वरिष्ठता प्रदान कर चुकी है।
सोमवार को पुलिस मुख्यालय ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए प्रदेश के रैंकर दारोगाओं को भी साल 1999 की वरिष्ठता दे दी। इससे प्रदेश के करीब 30 रैंकर दारोगाओं को लाभ मिलेगा। जल्द ही 100 के करीब दारोगाओं को प्रमोशन देकर इंस्पेक्टर बनाने की प्रक्रिया पूरी होनी है।