पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी (पेक) ने एक नया खाका तैयार किया है। योजना है कि टॉप- 40 इंजीनियरिंग शिक्षण संस्थानों में जगह बनानी है। यह तभी होगा जब निरफ रैंकिंग में भी यही स्थान मिले। इसके लिए पेक ने काम करना शुरू कर दिया है। रिसर्च से लेकर टीचिंग के क्षेत्र में बड़ा सुधार किया जाएगा। निरफ रैंकिंग के पैरामीटर पर खरा उतरने की तैयारी है।
पेक को ओवरआल रैंकिंग में पिछले कई वर्षों से बेहतर स्थान नहीं मिला। इंजीनियरिंग शिक्षण संस्थानों की सूची में कुछ बेहतर प्रदर्शन इस साल किया था। पेक की रैंकिंग 78 पायदान से 68 पर आ गई यानी संस्थान की ओर से बेहतर सुधार किए गए। कुल अंक 41.43 मिले थे। कमी छात्र-शिक्षक अनुपात की रही। शिक्षकों की संख्या यहां कम है। अस्थायी शिक्षकों के बलबूते विद्यार्थियों को पढ़ाया जा रहा है।
रिसर्च का क्षेत्र भी इसके कारण पिछड़ा है, क्योंकि विद्यार्थियों को पढ़ाने की जिम्मेदारी इन्हीं शिक्षकों की है। ऐसे में शिक्षकों को रिसर्च के लिए समय ही नहीं मिला। वर्ष 2018-19 में पेक ने महज दो ही पेटेंट दर्ज कराए जबकि यहां रिसर्च का बड़ा मंच है। पेक को 38 सहायक रिसर्च प्रोजेक्ट मिले थे और एजेंसियों से 19 फंडिंग रिसर्च प्रोजेक्ट मिले थे। पेक के खाते में कुल 1.94 करोड़ की रकम आई थी जो कम रही।
इसके अलावा जन संपर्क के मामले में भी पेक पिछड़ा है। बाहर जाकर शिक्षण संस्थानों में अपने कोर्सेज, संस्थान की छवि को बेहतर बनाने की कोशिश नहीं की गई थी। साथ ही संसाधनों के लिए बजट का भी अभाव रहा है।