यूजी डिग्री कोर्स में 2013 से लागू किए गए नए सीबीसीएस (च्वॉयस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम) का पहला बैच पास आउट होने से पहले इस सिस्टम को एचपीयू एक्ट/आर्डिनेंस का हिस्सा बनाना जरूरी है। इसके लिए 10 मई को विवि की कार्यकारी परिषद की बैठक संभावित है। बैठक में आर्डिनेंस में रूसा को शामिल किए जाने का प्रस्ताव भी मंजूरी के लिए रखा जाएगा।
इसी के साथ 7 मई को वित्त कमेटी की बैठक बुलाई गई है। विवि की अकादमिक और सामान्य प्रशासन शाखा पूरा मसौदा तैयार कर रही है। अब सिर्फ आधिकारिक तौर पर ईसी की बैठक की तिथि घोषित की जानी बाकी है। रूसा को आर्डिनेंस का हिस्सा बनाए जाने पर ही कानूनी तौर पर विवि इस डिग्री को छात्रों को दे पाएगा।
ऐसा होने पर ही छात्र रूसा की डिग्री से संबंधित पेश आने वाली किसी भी तरह की दिक्कतों और परेशानियों को लेकर कानूनी कार्रवाई करने में भी सक्षम होगा। एचपीयू के लिए पहले बैच के जून माह में पास आउट होने से पहले हर हाल में रूसा सीबीसीएस को आर्डिनेंस का हिस्सा बनाने की प्रक्रिया पूरी करनी ही होगी।
अब देखना यह है कि विवि इसमें किस हद तक सक्रियता दिखाता है। विवि के कुलसचिव डा. पंकज ललित ने माना कि कार्यकारी परिषद (ईसी) की बैठक 10 मई को तय की गई है। रूसा सीबीसीएस को आर्डिनेंस में शामिल करने का प्रस्ताव मंजूरी के लिए रखा जाएगा। जल्द ईसी की बैठक घोषित की जाएगी।
पहले बैच में पास आउट होंगे 2900 छात्र
शिमला। सीबीसीएस रूसा के तहत शुरू किए गए यूजी कोर्स के पहले बैच के सौ से अधिक डिग्री कॉलेजों में पढ़ रहे करीब 2900 छात्र जून में पास आउट होंगे। तीन मई से छठे अंतिम सेमेस्टर की परीक्षाएं देंगे, जो जून तक चलेगी। इसके परिणाम घोषित होने से पहले नया सिस्टम आर्डिनेंस का हिस्सा बनाया जाना जरूरी है।
नए सिस्टम की हर प्रक्रिया मिलेगी आर्डिनेंस में
सीबीसीएस सिस्टम के तहत करवाए जा रहे यूजी कोर्स के प्रवेश से लेकर परीक्षा फार्म भरने, परीक्षा देने, सब्जेक्ट च्वायस, आंतरिक मूल्यांकन, सेमेस्टर अंत की परीक्षाओं के मूल्यांकन के साथ परीक्षा परिणाम घोषित करने की समयसीमा सहित हर कार्य की समयसीमा तय होगी। वहीं, विवि, कॉलेजों की जिम्मेदारी तक तय होगी। ऐसा करने पर ही छात्रों अब तक पेश आ रही हर समस्या से निजात मिल पाएगी।
ईसी में कुलपति को डिग्री मान्यता पर भी रखना होगा पक्ष
इस माह के अंत में संभावित ईसी की बैठक में कुलपति प्रो. एडीएन वाजपेयी को अपने कहे मुताबिक यूजी डिग्री को मान्यता दिलवाने पर भी अपना पक्ष स्पष्ट करना पड़ेगा। पिछली ईसी ने कुलपति की अगुवाई में यूजीसी के समक्ष मामला उठा मान्यता दिलवाने की प्रक्रिया पूरी करने पर फैसला लिया था।