गोल्ड फील्ड मेडिकल कॉलेज की मैनेजमेंट द्वारा हाथ खड़ा करने पर संकट गहराता जा रहा है। कॉलेज में जहां पढ़ाई पूरी तरह ठप हो गई है। वहीं, अब बिजली, पानी और मेस की सेवाएं भी समाप्त कर दी गई हैं।
रामभरोसे चल रहे कॉलेज को बचाने के लिए एमबीबीएस छात्रों ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। साथ ही छात्रों ने शनिवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे राज्य सरकार के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज से मिलकर अपनी व्यथा बताने का निर्णय लिया है।
गौरतलब हो कि छांयसा स्थित मेडिकल कॉलेज में पिछले एक माह से छात्र आंदोलनरत हैं। एमबीबीएस छात्रों ने जिला प्रशासन, पीजीआई रोहतक के कुलपति से भी गुहार लगाई थी लेकिन अभी तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका है।
इसलिए अब छात्रों ने कानून का सहारा लेने का निर्णय लिया है। छात्रों का कहना है कि जल्द ही छात्र पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में याचिका दायर करेंगे।
डीजल खत्म, पूरी रात दिया पहरा
कॉलेज परिसर स्थित हॉस्टल में रह रहे एमबीबीएस छात्रों की परेशानी बृहस्पतिवार को और बढ़ गई। पहले से सुरक्षा का मोहताज कॉलेज परिसर अब अंधेरे में डूब गया है। बिजली कनेक्शन के कटने के बाद जनरेटर से आ रही तीन घंटे की बिजली भी बंद हो गई।
मैनेजमेंट ने अब जनरेटर में डीजल डालने से मना कर दिया है। बृहस्पतिवार पूरी रात दोनों हॉस्टल अंधेरे में डूबे रहे। छात्रों ने ग्रुप बनाकर पूरी रात पहरा दिया। बता दें कि सोमवार रात तीन लोगों ने गर्ल्स हॉस्टल में घुसने की कोशिश की थी।
स्वास्थ्य मंत्री को सुनाएंगे आप बीती
एमबीबीएस छात्रों को अब स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज से आशा की किरण दिखाई दे रही है। छात्र प्रवेश राव, अंजलि, गोविंद शर्मा ने बताया कि शनिवार सुबह 9:30 बजे मिलने का समय तय हुआ है। इस मौके पर छात्रों के साथ उनके अभिभावक भी मौजूद रहेंगे।
कर्मचारियों ने भी खोला मोर्चा
कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ अब कर्मचारी वर्ग भी लामबंद होने लगा है। कॉलेज व अस्पताल में कर्मचारियों की संख्या 12 सौ है। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें नवंबर माह से वेतन नहीं मिल रहा है। भूखे मरने की नौबत आ गई है। कर्मचारी लक्ष्मी व संतराम ने बताया कि इस संबंध में उन्होंने गत मंगलवार को जिला उपायुक्त को ज्ञापन दिया था लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं हुआ।