गीतकार एवं फिल्म निर्माता गुलजार
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मशहूर फिल्म निर्देशक, गीतकार और लेखक गुलजार ने पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) चंडीगढ़ से जुड़ने की हामी भर ली है। पीयू सिंडीकेट और सीनेट द्वारा गुलजार को कैंपस में रबींद्रनाथ टैगोर के सम्मान में स्थापित टैगोर चेयर की प्रोफेसरशिप को पहले ही मंजूरी दे दी थी। गुलजार ने पीयू कुलपति प्रो.अरुण कुमार ग्रोवर को भेजी चिट्ठी में टैगोर चेयरशिप को खुद के लिए बड़ा सम्मान बताया है।
गुलजार से पहले टैगोर चेयर की प्रोफेसरशिप जाने माने लेखक डा.मुल्क राज आनंद और हिंदी विद्वान डॉ.हजारी प्रसाद द्विवेदी ग्रहण कर चुके हैं। वीसी प्रो.ग्रोवर ने भी टैगोर चेयर की प्रोफेसरशिप स्वीकार करने पर गुलजार का धन्यवाद किया है। उन्होंने कहा कि गुलजार जैसी हस्ती के प्रोफेसर बनने से कैंपस के विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधकताओं को उनके अनुभवों का लाभ मिल सकेगा।
टैगोर से प्रभावित, दो रचनाओं का किया ट्रांसलेशन
1913 में नोबेल पुरस्कार पाने वाले रबींद्र नाथ टैगोर से गुलजार का गहरा नाता रहा है। गुलजार टैगोर की रचनाओं से खासे प्रभावित रहे हैं। हाल ही में उन्होंने टैगोर की दो महत्वपूर्ण रचनाओं निंदिया चोर और बागबां का अनुवाद भी किया। गुलजार के पीयू से जुड़ने से पत्रकारिता, हिंदी और अंग्रेजी विभाग के विद्यार्थियों को काफी कुछ नया सीखने को मिलेगा।
आस्कर समेत कई अवार्ड मिल चुके हैं
गुलजार देश को अंतरराष्ट्रीय फिल्म अवार्ड आस्कर के साथ ही पद्म भूषण, साहित्य अकादमी अवार्ड, दादासाहब फाल्के अवार्ड, नेशनल फिल्म फेयर अवार्ड से नवाजा जा चुका है। पीयू प्रशासन ने भी उनके बेहतरीन योगदान के लिए पीयू के पहले साहित्य रत्न अवार्ड से नवाजा था। पीयू कैंपस में आने पर गुलजार ने गोल्डन जुबली हाल में काफी खुशी जाहिर की थी।