दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज को अल्पसंख्यक दर्जा दिए जाने का मामला कोर्ट में लंबित है। बावजूद इसके लगातार ऐसी खबरें आ रही हैं कि इस बार कॉलेज की दाखिला प्रक्रिया अलग होगी।
इस तरह की खबरों से परेशान कॉलेज के शिक्षकों ने कुलपति और यूजीसी से गुहार लगाई है और मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। कॉलेज की शिक्षिका व इस मामले में कोर्ट में याचिकाकर्ता डॉ. वीना अग्रवाल ने बताया कि एसजीटीबी खालसा कॉलेज का मामला हाईकोर्ट में चल रहा है।
मामले पर अगली सुनवाई 18 अप्रैल को होनी है। ऐसे में यदि कॉलेज के अल्पसंख्यक दर्जे को आधार पर बनाकर दाखिला नीति तय करने का दावा किया जाता है, तो यह गलत है।
उन्होंने कहा कि ऐसी बातें सामने आ रही हैं कि खालसा कॉलेज को अल्पसंख्यक कॉलेज का दर्जा मिला हुआ है और दाखिला नीति अलग से बनाई जा सकती है।
डॉ. वीना ने बताया कि अब इस मामले में कुलपति व यूजीसी को पत्र लिखा गया है और हस्तक्षेप करने की मांग की गई है। मालूम हो कि अल्पसंख्यक दर्जा मिलने पर कॉलेज को सभी तरह के अधिकार प्राप्त हो जाएंगे।
ऐसे में शिक्षकों की सेवा शर्तों सहित अन्य नियमों पर भी असर पड़ेगा। डॉ. वीना कहती हैं कि जब तक कोर्ट में सुनवाई नहीं हो जाती है, तब तक यह कहना कि कॉलेज को अल्पसंख्यक कॉलेज का दर्जा मिला हुआ है, सही नहीं है।