शिक्षा का मकसद सिर्फ डिग्री पाना नहीं बल्कि जाति, धर्म, संप्रदाय से ऊपर उठकर देश और विकास में योगदान पर आधारित हो। विकास तभी होगा, जब हम एक-दूसरे को सहयोग करेंगे।
डिग्री मिलने के बाद नौकरी की चाह, सिर्फ पैसा कमाने के लिए नहीं, बल्कि एंज्वाय के लिए की जानी चाहिए। गरीब से गरीब आदमी के चेहरे पर यदि मुस्कान लाने में कामयाब हो जाते हो तो समझो जीवन या दिन सफल हो गया।
यह कहना है आईपी यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति और दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग का, वे शुक्रवार को दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित कर रहे थे। समारोह में कुल 20 हजार 690 छात्रों को डिग्री देकर सम्मानित किया गया।
द्वारका स्थित आईपी यूनिवर्सिटी के 11 वें दीक्षांत समारोह का उद्घाटन यूजीसी के पूर्व चेयरमैन और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. हरी गौतम ने किया।इससे पहले विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एके त्यागी ने वार्षिक रिपोर्ट पढ़कर सुनाई। प्रो. गौतम ने कहा कि दीक्षांत समारोह छात्रों के लिए आनंदमय महोत्सव है, जिसमें उनकी मेहनत और कठिन परिश्रम के फल में डिग्री मिलती है।
हालांकि हमें सिर्फ डिग्री तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि हमारा मकसद अज्ञानता, अशिक्षा से आजादी दिलाते हुए ज्ञान, जानकारी, कौशल को दूसरों से बांटना हो। समारोह में 59 छात्रों को पीएचडी, 4212 को मास्टर, 15776 को बैचलर , 405 को एमबीबीएस 180 तो 24 को डीएम/एमसीएच और 34 को आईएएमआर की डिग्री देकर सम्मानित किया गया।