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शिक्षा पर भारी स्कूलों की तानाशाही, धारा 134-ए का बना मजाक

Sun, 01 May 2016 08:38 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
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स्‍कूल - फोटो : DEMO PIC
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हरियाणा शिक्षा नियमावली की धारा 134-ए के तहत ईडब्ल्यूएस (इकॉनोमिकल वीक सेक्शन) के बच्चों की प्रक्रिया को स्कूलों ने मजाक बनाकर रख दिया है। 
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धारा 134-ए के तहत फरीदाबाद में करीब 500 स्कूलों में बीपीएल कैटेगरी में स्कूलों में करीब 584 आवेदन आए। इन आवेदन में से भी विभाग की ओर से 150 आवेदनों को रद कर दिया गया। 

जब अभिभावकों ने आवेदन रद की जानकारी मांगी तो विभाग की ओर से कागजों में कमी बताई।  स्कूल में एडमिशन न देने के कारण प्रबंधन की ओर से आवेदनों मे कमी बताकर कई आवेदन रद कर दिए गए। बृस्पतिवार को  बीईओ कार्यालय पर  लिस्ट निकाली गई। जिसमें 150 आवेदन रद पाए गए। 
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बीपीएल बच्चों की शिक्षा के लिए काम कर रही संस्था मिशन तालीम के इकरामुल हक ने बताया कि स्कूल गरीब बच्चों को एडमिशन देना ही नहीं चाहते। स्कूलों के नियम सरकार के आदेशों से भी बड़े हैं।  उन्होंने बताया कि 134ए के तहत बीपीएल केटेगरी में 10 प्रतिशत  कोट होता है। क्या फरीदाबाद के स्कूलों में इन बच्चों के लिए एक भी सीट नहीं है। 

आज होगी परीक्षा
गरीब बच्चों को निजी स्कूलों में एडमिशन के लिए रविवार को परीक्षा का आयोजन किया जाएगा। इस परीक्षा में 55 प्रतिशत अंक पाने वाले बच्चों को ही एडमिशन मिलेगा। इकरामुल हक ने बताया कि यदि कोई बच्चा 55 प्रतिशत अंक नहीं ला पाता है तो क्या उसे पढने का अधिकार नहीं है।  यदि ऐसा हे तो धारा 134ए को समाप्त कर देना चाहिए। 
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इसलिए कम हुए आवेदन
स्कूलों में आवेदन के लिए  छात्र से चार दस्तावेज मांगे गए थे। इसमें निवास प्रमाण पत्र,  जन्म प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र तथा बच्चे का आधार कार्ड।  ये दस्तावेज काफी अभिभावकों के पास नहीं थे। जिसके कारण वो आवेदन ही नहीं कर पाए। जिन अभिभावकों ने ये कार्रवाई पूरी भी कि तो उनके कागजों में कमी निकालकर आवेदन रद कर दिए गए। 
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