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गेस्ट टीचरों का आंदोलन स्थगित 

Thu, 21 Apr 2016 04:30 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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मंत्री प्रसाद नैथानी - फोटो : AmarUjala
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नियुक्ति की मांग को लेकर आंदोलनरत गेस्ट टीचरों ने शिक्षा सत्र तक तैनाती के शासनादेश के बाद आंदोलन स्थगित कर दिया। गेस्ट टीचरों ने कहा कि 15 मई से नियुक्ति प्रक्रिया शुरू न हुई तो वे फिर से सड़कों पर उतरने को बाध्य होंगे। वही शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी का 48 घंटे का उपवास भी समाप्त हो गया। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने उन्हें जूस पिलाकर उपवास समाप्त कराया।
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अनशन समाप्त होने के बाद अनशन स्थल पर पहुंचे पूर्व शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने कहा कि गेस्ट टीचरों के मामले में राजनीति नहीं होनी चाहिए। गेस्ट टीचरों का भविष्य सुरक्षित हो इसके प्रयास होने चाहिए। पूर्व शिक्षा मंत्री ने कहा कि गेस्ट टीचरों की 15 मई से नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होने का आश्वासन मिला है, यदि इसके बाद भी इनकी अनदेखी हुई तो इनके समर्थन में प्रदेश भर में जन आंदोलन शुरू किया जाएगा।

दस हजार से अधिक पद खाली
पूर्व राज्यमंत्री राजेंद्र शाह ने कहा कि शिक्षा विभाग में शिक्षकों के दस हजार से अधिक पद खाली हैं। विभाग इन पदों पर इनका समायोजन करे। इससे पहले सिटी मजिस्ट्रेट ललित नारायण मिश्रा ने अनशन पर बैठे गेस्ट टीचरों को जूस पिलाकर उनका अनशन समाप्त कराया। गेस्ट टीचर संघ के अध्यक्ष शांतिस्वरूप ने कहा कि एक शिक्षा सत्र तक नियुक्ति, नई विज्ञप्ति निरस्त करने और नियमित शिक्षकों की नियुक्ति के बाद गेस्ट टीचरों की तैनाती के शासनादेश के बाद आंदोलन स्थगित कर दिया गया है। 
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कांग्रेस सरकार ने दी नियुक्ति: रावत  
गेस्ट टीचरों के अनशन समाप्त करने से पहले शिक्षा मंत्री ने अपना उपवास समाप्त किया। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने जूस पिलाकर उनका उपवास समाप्त कराया। इस मौके पर पूर्व सीएम ने कहा कि गेस्ट टीचरों को कांग्रेस सरकार ने नियुक्ति दी, उनकी अन्य मांगों पर भी अमल किया जाए। 

जीओ जारी होने के बाद राजनीति 
गेस्ट टीचरों की नियुक्ति की मांग पर शासनादेश 18 अप्रैल को जारी होने के बावजूद दो दिन तक मामले में खूब राजनीति हुई। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि उन्हें शासनादेश की जानकारी नहीं है, न ही पूर्व शिक्षा मंत्री को शासनादेश के बारे में बताया गया है। उन्होंने कहा कि यदि जीओ हुआ है तो यह स्वागत योग्य कदम है। सवाल यह है कि 18 अप्रैल को जारी हुआ जीओ क्या 19 अप्रैल को भी पूर्व सीएम और पूर्व शिक्षा मंत्री के पास नहीं पहुंचा या फिर पूरे मामले को जबरन तूल देकर आंदोलन जारी रखा गया।  
संगठन में नहीं दिखा समन्वय 
गेस्ट टीचरों के आंदोलन के दौरान संगठन पदाधिकारियों के बीच समन्वय का अभाव साफ नजर आया। कुछ संगठन पदाधिकारी पहले ही आंदोलन स्थगित करने की घोषणा करते रहे तो कुछ आंदोलन पर अड़े थे।
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