हिसार के लुवास में हरियाणा का पहला डेयरी कॉलेज खुलने जा रहा है। इसमें नौकरी करने को और दाखिला लेने के लिए तैयार रहें। इस कॉलेज में विभिन्न कोर्सों के पाठ्यक्रम को देश के अन्य कॉलेजों के अनुसार ही रखा जाएगा। शुरुआती सत्र से ही नए डेयरी कॉलेज का पाठ्यक्रम देश के अन्य कॉलेजों के अनुसार ही होगा। यह जानकारी डेयरी ऑफ साइंस कॉलेज के निदेशक डॉ. रणधीर सिंह डाबर ने दी।
निदेशक डाबर ने बताया कि नए कॉलेज में सभी विषयों के पाठ्यक्रम को देश के अन्य 19 कॉलेज के पाठ्यक्रमों के अनुसार ही रखा जाएगा, ताकि एक ही पाठ्यक्रम होने के कारण डेयरी संस्थानों व मिल्क प्लांटों में विद्यार्थियों को नौकरी प्राप्त करने में आसानी रहे। इसके लिए देश के सभी 19 कॉलेजों में एक ही पाठ्यक्रम रखने की प्रक्रिया आरंभ की जा चुकी है।
डेयरी विभाग में हजारों नौकरियां
देश में डेयरी विभाग में काम करने के लिए हर साल 1000 डेयरी ग्रेजुएट की आवश्कयता पड़ती है, लेकिन देश के 19 कॉलेजों से हर साल करीब 750 छात्र ही डेयरी कोर्स में ग्रेजुएट की डिग्री प्राप्त कर पाते हैं। इस कारण शेष नौकरियां रिक्त ही रह जाती हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए नए डेयरी कॉलेज का निर्माण किया जा रहा है।
यह होगा पाठ्यक्रम
हरियाणा के पहले डेयरी कॉलेज में देश के अन्य कॉलेजों की भांति ही डेयरी टेक्नोलॉजी में चार वर्षीय बीटेक का कोर्स करवाया जाएगा। कोर्स में सेमेस्टर के हिसाब से अलग-अलग डेयरी टेक्नोलॉजी के विषय दिए जाएंगे। प्रथम वर्ष में कुल आठ विषय दिए गए हैं। पहले सेमेस्टर में फिजिकल केमिस्ट्री ऑफ मिल्क, मिल्क प्रोडक्शन और डेयरी डेवलपमेंट, इंजीनियरिंग ड्राइविंग, वर्कशाप टेक्नोलॉजी के साथ अन्य विषय भी देश के अन्य कॉलेजों के अनुसार ही दिए गए हैं। सभी कॉलेजों में एक ही पाठ्यक्रम में डेयरी इंजीनियरिंग में बीटेक का कोर्स करवाया जाएगा।
देश के सभी 19 कॉलेजों के अनुसार ही लुवास के नए डेयरी कॉलेज में बीटेक के चार वर्षीय कोर्स का पाठ्यक्रम होगा। ऐसा देश के सभी डेयरी कॉलेजों में किया जा रहा है, ताकि डेयरी ग्रेजुएट को जॉब मिलने में आसानी रहे।
- रणधीर सिंह डाबर, निदेशक, कॉलेज ऑफ डेयरी साइंस