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'अपनी भाषा में शिक्षा ग्रहण नहीं करते छात्र'

Sun, 06 Mar 2016 10:16 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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ज्यादातर छात्र उस भाषा में शिक्षा ग्रहण करते हैं जो उनकी मातृभाषा नहीं है - फोटो : amar ujala
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भारत में लगभग एक हजार छह सौ बावन भाषाएं और बोलियां बोली जातीं हैं। यह एक विडंबना है कि यहां ज्यादातर छात्र उस भाषा में शिक्षा ग्रहण करते हैं जो उनकी  मातृभाषा नहीं है।
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इस समस्या का समाधान अंग्रेजी भाषा के माध्यम से किया जा सकता है। शुरुआत से ही अंग्रेजी का उपयोग स्टूडेंट्स को इस समस्या से मुक्ति दिला सकता है।

ऑकलैंड कैलीफोर्निया के लैनी कॉलेज से आए आंग्ल भाषा प्रोफेसर डॉ. मेयर्ल सैगल ने ये विचार एमिटी यूनिवर्सिटी में अंग्रेजी भाषा पर हुए तीन दिवसीय सेमिनार के समापन के मौके पर कहे।

‘नो वन लेफ्ट बिहाइंड-दी रोल ऑफ  ईएलटी इन प्रमोटिंग इनक्लूसिव ग्रोथ’  विषय पर हुए सेमिनार में क्षेत्रीय आंग्ल भाषा अधिकारी, एम्बेसी यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ  अमेरिका के डॉ. ब्राडली हार्न ने कहा कि शिक्षा व्यक्तिगत और सामाजिक दोनों स्तरों पर आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण स्थान रखती है।
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हमें यह देखना और खोजना होगा कि हम अंग्रेजी भाषा का उपयोग शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में किस प्रकार कर सकते हैं।

समापन सत्र के दौरान एमिटी विश्वविद्यालय प्रति कुलपति सेवानिवृत्त मेजर जनरल केके ओहरी ने स्मृति चिह्न प्रदान कर अतिथियों का स्वागत किया।
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