एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एकेटीयू) के कॉलेजों को दी जाने वाली सालाना संबद्धता की प्रक्रिया सवालों के घेरे में है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक 15 मई तक सत्र 2016-17 की संबद्धता प्रक्रिया पूरी हो जानी चाहिए थी, लेकिन निर्धारित समय में इसे पूरा नहीं किया जा सका।
मामला कोर्ट में पहुंचा तो यूनिवर्सिटी के 700 कॉलेजों पर शून्य सत्र का खतरा मंडरा सकता है। दरअसल, 2012 में तत्कालीन रजिस्ट्रार यूएस तोमर ने तय समय के बाद कुछ कॉलेजों को संबद्धता जारी की थी। इस मामले में उन्हें पद से हटाते हुए जांच बैठ दी, जो अभी चल रही है। 13 दिसंबर 2012 को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश देते हुए देश की तकनीकी शिक्षा के लिए एकेडमिक शेड्यूल तय कर दिया था।
इसके मुताबिक 10 अप्रैल तक ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) की ओर से कॉलेजों को दी जाने वाली मान्यता प्रक्रिया पूरी करनी है। 15 मई तक संबंधित विश्वविद्यालयों और प्रदेश सरकार को संबद्धता प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश की तिथि गुजर चुकी है लेकिन एकेटीयू ने अभी तक किसी भी कॉलेज को 2016-17 के लिए संबद्धता नहीं दी। अब इस मामले में विश्वविद्यालय के कुलाधिपति और कुलपति क्या फैसला लेंगे। यदि किसी पार्टी की तरफ से कोर्ट में केस दायर हो गया तो आगामी सत्र का भविष्य खतरे में पड़ सकता है।
कुलपति प्रोफेसर विनय कुमार पाठक का कहना है कि संबद्धता तब काम करती है जब काउंसलिंग होती है। अभी तो कॉलेजों के रिजल्ट आएंगे फिर 22 जून से काउंसलिंग होगी। वहीं संबद्धता देख रहे विवि के डिप्टी रजिस्ट्रार एके शुक्ला का कहना है कि शासन से जो निर्णय लिए गए उस पर कार्रवाई चल रही है।
ये है आदेश
सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार 10 अप्रैल तक एआईसीटीई द्वारा मान्यता देने की है। जिन मामलों में सुनवाई होनी है उन 30 अप्रैल तक मान्यता देने की अंतिम तिथि है। इसके बाद 15 मई तक यूनिवर्सिटी को संबद्धता देनी होती है। 1 अगस्त से एकेडमिक सेशन की शुरुआत होनी है और 15 अगस्त तक खाली सीटें भरी जानी है।