प्रदेश विश्वविद्यालय को प्रदेश सरकार की ओर से मिलने वाली ग्रांट में इस बार भी आंशिक बढ़ोतरी ही होने की सूचना है। विश्वविद्यालय को वित्त वर्ष 2016-17 में सिर्फ 10 करोड़ की बढ़ोतरी ही होगी। सूत्रों की मानें तो एचपीयू को लिने वाला अनुदान 79 करोड़ से बढ़कर सिर्फ 89 करोड़ के करीब हुआ है।
इससे विश्वविद्यालय को राहत जरूर होगी लेकिन आर्थिक तंगी दूर होना तो दूर विश्वविद्यालय को कर्मचारियों और शिक्षकों के वेतन और पेंशन का भुगतान करना भी संभव नहीं होगा। सूत्र बताते हैं कि विवि को मद संख्या आठ के तहत सिर्फ 59.57 करोड़ और डिमांड संख्या 32 के तहत 22.42 करोड़ की ग्रांट ही मिलनी है।
इस बार एसटी को डिमांड नंबर 31 के तहत भी ग्रांट का बजट में कोई जिक्र नहीं है। वहीं आठ करोड़ एसटी मद में मिला है। प्रदेश सरकार से इस बार सौ करोड़ का बजट मिलने की आस लगाए बैठे विवि समुदाय और प्रशासन को अब अपने सीमित साधनों से वेतन पेंशन तक का गुजारा करना मुश्किल होगा।
हालांकि आधिकारिक तौर पर विवि को इस बजट में कितना बजट मिलेगा पुष्टि नहीं कर रहा है। विवि को अभी भी आशा है कि विश्वविद्यालय के विकास कार्यों के साथ ही घणाहट्टी में अलग कैंपस विकसित करने को अन्य मदों में प्रदेश सरकार के बजट में ग्रांट मिले।