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विश्व बैंक का अनुमान, आगामी दो वर्षों में चीन से ज्यादा रहेगी भारत की विकास दर

Mon, 05 Jun 2017 07:37 PM IST
amarujala.com- Submitted by: मुकेश झा
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विश्व बैंक - फोटो : Getty
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विश्व बैंक ने वर्ष 2017 के लिए भारत की विकास दर का अनुमान 7.2 फीसदी रखा है और कहा है कि भारत नोटबंदी के तात्कालिक प्रभाव से बाहर निकल रहा है। विश्व बैंक के अधिकारियों ने इस अनुमान के बारे में कहा कि बैंक ने भले ही देश का विकास दर अनुमान जनवरी में घोषित अनुमान के मुकाबले 0.4 फीसदी कम कर दिया है, फिर भी भारत दुनिया की सबसे तेज विकास दर वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है।
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विश्व बैंक ने चीन के लिए विकास दर अनुमान को पुराने स्तर पर बरकरार रखा है, जिसके मुताबिक चीन की विकास दर 2017 में 6.5 फीसदी रहेगी और उसके बाद अगले दो साल 2018 और 2019 में यह दर 6.3 फीसदी रहेगी। विश्व बैंक ने अपनी ताजा ग्लोबल इकनॉमिक प्रॉस्पेक्ट्स रिपोर्ट में 2018 और 2019 के लिए भारत का विकास दर अनुमान क्रमश: 7.5 फीसदी और 7.7 फीसदी पर रखा है। इन दोनों ही वर्षों के लिए हालांकि बैंक ने भारत के विकास दर अनुमान को जनवरी 2017 में पेश अनुमान के मुकाबले क्रमश: 0.3 फीसदी और 0.1 फीसदी कम कर दिया है।

भारत के विकास दर अनुमान को कम करने का प्रमुख कारण बताते हुए विश्व बैंक ने कहा है कि यह निजी निवेश में अपेक्षा से कम रफ्तार से हो रही वृद्घि को परिलक्षित करता है। बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2016 में भारत में अनुकूल मानसूनी बारिश (जिसने कृषि और ग्रामीण खपत को बढ़ावा मिला था), इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च में बढ़ोतरी और सरकारी खपत में तेजी से अर्थव्यवस्था को गति मिली थी।
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नकदी किल्लत घटने से स्थिति सुधरी
विश्व बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में हाल के आंकड़ों से पता चलता है कि इस साल नकदी किल्लत कम होने और निर्यात बढ़ने से स्थिति में सुधार हुआ है। भारत में सरकारी खर्च में हुई वृद्धि (जिसमें पूंजी सृजन पर हुआ खर्च भी शामिल है) ने आंशिक रूप से निजी निवेश में देखी जा रही सुस्त गति की भरपाई कर दी है। इस दौरान मैन्यूफैक्चरिंग पीएमआई में आम तौर पर वृद्धि रही है, लेकिन औद्योगिक उत्पादन का स्तर मिला-जुला रहा है।

घरेलू मांग रहेगी मजबूत
बैंक ने कहा कि देश के विकास दर अनुमान में पिछले अनुमान के मुकाबले कुछ कटौती की गई है, लेकिन यह परिदृश्य निजी निवेश में अपेक्षा से धीमी गति को परिलक्षित करता है। फिर भी भारत की घरेलू मांग मजबूत रहने वाली है। इस दौरान अर्थव्यवस्था को चालू नीतिगत सुधारों का भी सहारा मिलेगा, जिसमें खास तौर से वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लागू किया जाना भी शामिल है।

बैंकिंग सेक्टर में सुधार जरूरी
वर्ल्ड बैंक ग्रुप्स डेवलपमेंट प्रॉस्पेक्ट्स ग्रुप के निदेशक एम आयहान कोस ने एक सवाल का जवाब देते हुए बैंकिंग सेक्टर में सुधार को जरूरी बताया। कोस ने कहा कि सरकार ने बैंकिंग सेक्टर की कमजोरी को दूर करने के लिए कदम उठाया है, लेकिन यह काम अभी पूरा नहीं हुआ है।
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