कानपुर के कमल कांत वर्मा एक निजी कंपनी में अट्ठारह साल काम करने के बाद इसी साल रिटायर हुए हैं। एक सप्ताह पहले उन्हें सारी बकाया राशि मिल गई। वह इसमें से 10 लाख रुपये किसी ऐसी सुरक्षित जगह निवेश क ना चाहते हैं, जहां उनके रुपये डूबने का खतरा न हो और जिससे उनके रिटायर्ड जीवन में मदद मिलती रहे। उन पर कोई वित्तीय देनदारी नहीं है और वह अपने ही घर में रहते हैं। उनके दो बेटे मुंबई और बंगलूरू में नौकरी करते हैं। दरअसल पिछले 18-20 साल से रोजाना 12-14 घंटे की नौकरी कर वह थक चुके हैं, लिहाजा रिटायरमेंट के बाद पत्नी के साथ कुछ दिन आराम से गुजारना चाहते हैं।
सुरक्षित निवेश एक मिथक बचत और निवेश के साथ जोखिम हमेशा जुड़ा रहा है। फिक्स्ड डिपॉजिट और बैंक में की गई बचत से निश्चित रिटर्न मिलता है, लेकिन इसका वास्तविक मूल्य बढ़ता नहीं है। इन निवेश योजनाओं में मिलने वाले ब्याज से मुद्रास्फीति की दर और चुकाए गए आयकर को घटा दें, तो आपके हाथ शायद ही कुछ आता है। जैसे, आठ प्रतिशत के गारंटेड रिटर्न में से 6.5 फीसदी की मुद्रास्फीति की दर और 10 फीसदी आयकर को घटा दें, तो वास्तविक रिटर्न 0.7 फीसदी ही होता है। चूंकि फिक्स्ड रिटर्न ब्याज में लगातार कमी आ रही है और मुद्रास्फीति की दर निरंतर ऊपर जा रही है, ऐसे में, बैंक में रखे रुपये का मूल्य नहीं बढ़ रहा।
इक्विटी या डेट फंड में निवेश का हमेशा ही जोखिम रहता है। यह जोखिम दो किस्म का होता है-एक तो जो मूलधन आप लगाते हैं, उस पर असर पड़ने की आशंका रहती है, दूसरा यह कि निवेश पर मिलने वाला रिटर्न भी अपेक्षा से कम हो सकता है या नहीं मिल सकता है। मसलन, म्यूचुअल फंड्स में निवेश पर रिटर्न की कोई गारंटी नहीं है। जबकि इक्विटी और डेट म्यूचुअल फंड्स में निवेश न केवल टैक्स बचत के लिहाज से लाभकारी है, बल्कि लंबी अवधि में इस पर मुद्रास्फीति का भी असर नहीं होता।
वरिष्ठ नागरिक की दुविधा
वरिष्ठ नागरिक सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम और प्रधानमंत्री वय वंदन योजना जैसे गारंटीशुदा रिटर्न योजनाओं में निवेश कर सकते हैं। पर इन योजनाओं में मिलने वाला रिटर्न घटने से उन्हें बहुत लाभ नहीं हो रहा। अनेक वरिष्ठ नागरिक बैंक जमा और बचत पर मिलने वाले ब्याज पर निर्भर हैं। यह रवैया आर्थिक रूप से बेहद घातक है, क्योंकि एक तरफ साल दर साल उनकी आय घट रही है, दूसरी ओर, उनके घर का खर्च बढ़ रहा है। बेहतर रिटर्न के लिए उन्हें कुछ खतरा उठाने को तैयार रहते हुए अपनी बचत को निवेश के लिए अलग-अलग समयावधि वाली दो-तीन योजनाओं में बांट देना चाहिए।
इनमें से एक निवेश योजना सात साल की, जिसमें जोखिम है, दूसरी निवेश योजना चार से सात साल की, जिसमें जोखिम कुछ कम है और तीसरी योजना बगैर किसी जोखिम के चार साल की हो सकती है। सात साल के लिए निवेश लार्ज कैप इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में करना चाहिए। इसमें जोखिम तो है, पर इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में वे कम जोखिम वाले हैं। इक्विटी में निवेश का रिटर्न ज्यादा मिलता है, इस पर मुद्रास्फीति का असर नहीं पड़ता और टैक्स बचत के लिहाज से भी यह लाभकारी है।
चार साल वाली निवेश योजना के तहत पीएमवीवीवाई या मध्य अवधि वाले किसी डेट फंड का चुनाव किया जा सकता है। डेट फंड हालांकि रिटर्न की गारंटी नहीं देते, पर इनका रिटर्न फिक्स्ड डिपॉजिट से ज्यादा होता है। और तीन-चार साल की निवेश योजना में कुछ पैसा बैंक में, और शेष लिक्विड म्यूचुअल फंड में रखना चाहिए, क्योंकि यह टैक्स बचत के लिहाज से लाभकारी है। कमल कांत वर्मा को अगर 10 लाख रुपये फिलहाल खर्च के लिए नहीं चाहिए, तो बेहतर रिटर्न हासिल करने के लिए इसे उन्हें अलग-अलग समय अवधि के म्यूचुअल फंड्स में रखना चाहिए।