केंद्र सरकार अक्सर विकास के बड़े बड़े दावे करती रहती है, लेकिन असलियत के धरातल पर सच्चाई कुछ और ही है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फॉरम की हालिया रिपोर्ट ने भारतीय अर्थव्यवस्था की पोल पट्टी खोल कर रख दी है। जी हां, समावेशी विकास सूचकांक पर उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं के बीच बीते शुक्रवार यानि 19 जनवरी को भारत 62 वें स्थान पर था। यह स्थान पड़ोसी देश चीन और पाकिस्तान से बहुत पीछे है। चीन जहां 26वें स्थान पर था वहीं पाकिस्तान भारत से आगे 47वें स्थान पर काबिज है।
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) ने अपनी वार्षिक बैठक की शुरुआत से पहले ही यह वार्षिक सूचकांक जारी किया। इस बैठक में दुनिया के बड़े नेता जैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप भी शिरकत करेंगे। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम इन देशों को कुछ मानकों के आधार पर ही इनका स्थान निर्धारित करती है। इन मानकों में देश के लोगों के रहने का तरीका, पर्यावरण में ठहराव और भविष्य की पीढ़ियों के आगे ऋणग्रस्तता से संरक्षण जैसी चीजें शामिल हैं। ऐसे में डब्ल्यूईएफ की रिपोर्ट में भारत का पाकिस्तान और नेपाल जैसे विकासशील देशों से भी पीछे रहना चिंता करने लायक है।
पिछले साल 79 विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में भारत 60 वां स्थान पर रहा था, जबकि चीन 15 वें और पाकिस्तान 52 वें स्थान पर था। उभरती अर्थव्यवस्था के नाम पर बेहद कम स्कोर होने के बावजूद तेजी से विकास करने वाले दस देशों में भारत ने अपनी जगह बनाई है।
इन देशों की अर्थव्यवस्थाएं हैं टॉप पर-
नॉर्वे
आयरलैंड
लक्जमबर्ग
स्विट्जरलैंड
डेनमार्क
भारत के पड़ोसी देश जिनकी अर्थव्यवस्था भारत से बेहतर है उनमें श्रीलंका 40वे स्थान पर, बांग्लादेश 34वे स्थान पर और नेपाल 22वे स्थान पर शामिल हैं। यही नहीं भारत से कहीं छोटे देश माली, युगांडा, रवांडा, बुरुंडी, घाना, यूक्रेन, सर्बिया, फिलीपींस, इंडोनेशिया, ईरान, मैसेडोनिया, मैक्सिको, थाईलैंड और मलेशिया भी अर्थव्यवस्था के नाम पर भारत से अमीर है।